बस्तर में 150 नए एफओबी: माओवादी गलियारे ध्वस्त, विकास की नई सुबह

नई दिल्ली। बस्तर का जो क्षेत्र सैकड़ों किलोमीटर तक फैले घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और उफनते नदियों से भरा हुआ है, कभी माओवादियों का अभेद्य किला रहा है। यहां चार दशकों तक माओवादी सक्रिय थे, जहां न सड़कें थीं, न बिजली, और न ही पुल। ताड़मेटला में 76 जवानों के बलिदान और बुर्कापाल जैसे हमले इस बात के गवाह हैं कि बस्तर में माओवादी गतिविधियों का प्रभाव कितना गहरा था। वर्ष 2021 में टेकुलगुड़ेम में सुरक्षाबलों पर माओवादियों के हमले ने इस स्थिति में पहली बार निर्णायक बदलाव किया। इस हमले के बाद सुरक्षाबलों ने जंगल में स्थायी उपस्थिति बनाने की रणनीति अपनाई। इसके परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 150 नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) स्थापित किए गए। वर्तमान में बस्तर रेंज में 320 सुरक्षा कैंप और एफओबी सक्रिय हैं, जो छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, और अन्य अ‌र्द्धसैनिक बलों द्वारा संचालित हैं।

RO No. 13467/11