
अंबिकापुर। टमाटर की महंगाई से हर आम व खास लोग कुछ माह पूर्व काफी परेशान थे। अंबिकापुर की सब्जी मंडी में टमाटर की कीमत लगभग 200 प्रति किलो पहुंच गई थी किंतु बरसात बीतते ही स्थानीय स्तर पर आवक बढ़ गई। किसानों ने टमाटर की इतनी खेती कर दी कि वर्तमान समय में बाजार में टमाटर की भरमार है।10 रुपये प्रति किलो की दर से फुटकर में टमाटर मिल रहा है।
बड़े किसानों को और भी कम दाम मिल रहा है। मंडी में लगभग पांच से सात रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बेचना पड़ रहा है। बाजार में टमाटर बड़े पैमाने पर पहुंच रहा है, ऐसे में ग्राहक भी छांट-छांट कर बेहतर टमाटर खरीद रहे हैं। थोड़ा भी डैमेज टमाटर है उसे खरीदने से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में बाजार में फुटकर व्यापारी,टमाटर उत्पादक किसान टमाटर छोडक़र चले जा रहे हैं।जिस टमाटर का दाम सुनकर लोग खासे परेशान हो जाते थे वही टमाटर यहां के सब्जी बाजार में मवेशी खाते नजर आ रहे हैं। बता दें, सरगुजा जिले में धौरपुर,लुंड्रा सहित आसपास के कई गांव में लगभग दो हजार हेक्टेयर में टमाटर की खेती हुई है। बड़े किसानों ने पांच एकड़ से लेकर 20 एकड़ तक में टमाटर की खेती की है।लुंड्रा का उदारी क्षेत्र टमाटर का हब बन गया है।यहां के किसानों को उम्मीद थी कि अक्टूबर माह में अच्छा दाम मिलेगा पर टमाटर की आवक बढ़ी तो दाम में गिरावट आ गई। शुरुआती दिनों में टमाटर 20 से 25 किलो बिक रहा था किंतु दाम में इतनी तेजी से गिरावट आ गई कि वर्तमान में 10 से 15 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बिक रहा है। किसानों की माने तो बड़े पैमाने पर अभी टमाटर निकलना शेष है। अधिकांश किसानों के खेत में अभी लगा टमाटर फूलने की स्थिति में है। कुछ किसानों का टमाटर फलने लगा है, ऐसे में भरपूर आवक अभी बरकरार रहने की पूरी संभावना है। आने वाले दिनों में टमाटर का दाम बढ़ेगा ऐसा नहीं लग रहा।
किसानों का कहना है कि टमाटर के दाम में अभी और गिरावट आ सकती है। बता दें, कुछ वर्ष पूर्व संभाग के जशपुर सहित सरगुजा में टमाटर सडक़ में फेंक कर प्रदर्शन भी किया गया था। तब कई तरह की योजनाएं सरकार ने बनाई। टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की घोषणा की गई पर अब तक इसको लेकर कोई बड़ा काम नहीं किया गया है। टमाटर उत्पादक किसान मेहनत कर टमाटर उत्पादन करते हैं पर बाजार में उसकी कीमत नहीं मिल पाती। पहली बार यहां जुलाई से सितंबर माह तक टमाटर की कीमत आसमान पर थी। जुलाई, अगस्त माह में तो टमाटर की कीमत लगभग 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी थी। बेंगलुरु से आने वाला टमाटर भी यहां नहीं पहुंच रहा था। एक दो किसानों ने टमाटर की खेती की थी वह मालामाल हो गए।इसी दौरान किसानों ने मंहगाई को देखते हुए टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर कर दी जो अब बढिय़ा दाम नहीं दे रहा है। दस दिन पूर्व बलरामपुर जिले के रामानुजगंज मुख्यालय में टमाटर के दाम में आई गिरावट के कारण किसानों ने अपना टमाटर रामानुजगंज की सडक़ों पर फेंक दिया था।
इसके बाद सडक़ पर टमाटर फेंकने की कोई घटना सामने नहीं आई है किंतु अंबिकापुर के गुदरी बाजार में मवेशियों को टमाटर खाते देखा जा रहा है। अंबिकापुर के गुदरी बाजार में फुटकर में साग सब्जी बेचने वाले सब्जी विक्रेता 20 रुपये में डेढ़ किलो बेहतरीन आकर के टमाटर की बिक्री करते हैं।शाम ढलते टमाटर की कीमत में अचानक गिरावट आ जाती है और 10 प्रति किलो की दर से टमाटर बिकने लगता है। हर रोज इसी तरह टमाटर के दाम में उतार-चढ़ाव आ रहा है किंतु 15 रुपये से टमाटर आगे नहीं बढ़ रहा।





















