सरकारी तालाब की भेंट चढ़ी किसान की 25 डिसमिल जमीन

कोरबा। रोगदा गांव में प्रशासन के द्वारा तैयार किए गए एक सरकारी तालाब के चक्कर में वहां के किस राम प्यारे पटेल की पैतृक 25 दिसंबर जमीन समर्पित हो गई। इसे वापस पाने के लिए वह अब कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर है।इस मामले की शिकायत करने के लिए एक बार फिर पटेल सोमवार को आयोजित जन दर्शन में पहुंचा। उसने बताया कि लगभग 45 वर्ष पहले गांव में एक सरकारी तालाब का निर्माण कराया गया। इसी के नजदीक उसकी अलग-अलग स्थान पर कुल 25 डिसमिल जमीन थी। उसे समय रामप्यारी की उम्र काफी कम थी। ऐसी स्थिति में ना तो उसे बताया गया और ना ही उसके परिजनों को। बिना जानकारी के उसकी जमीन को तालाब में समाहित कर दिया गया। नियमानुसार ना तो बीच में पार बनाई गई और ना ही जमीन को सुरक्षित रखने की जरूरत समझी गई। कृषक के द्वारा पिछले 20 साल से अपनी जमीन को वापस पाने के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है और कई बार आवेदन दिए गए हैं लेकिन कोई नतीजे नहीं आ सके। उसने कहा कि सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि सरकार से कोई कैसे संघर्ष करें।

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