
जांजगीर । सडक़ खराब बनने से ठेकेदार को तीन से चार साल तक मरम्मत करना रहता है। लेकिन ठेकेदार ने इस सडक़ को आज तक मुडक़र भी नहीं देखा। इसके चलते सडक़ दिन ब दिन उखडऩे लगी है। मामले की शिकायत ग्रामीणों ने कार्यपालन अभियंता से करते हुए इसकी मरम्मत की मांग की है। गौरतलब है कि अफरीद से बम्हनीडीह की सडक़ 27 करोड़ रुपए की लागत से बनी है। बीते वर्ष ही सडक़ निर्माण का कार्य पूर्ण हो पाया है। ठेकेदार ने सडक़ की गुणवत्ता की अनदेखी की है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यह सडक़ लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई है। विभागीय अधिकारियों ने जब सडक़ बन रही थी तो मॉनिटरिंग नहीं की। जिसके चलते सडक़ निर्माण में ठेकेदार ने खुलकर गड़बड़ी की है। सडक़ इतनी घटिया बनी है कि पहली बारिश में ही कई स्थानों से उखड़ रही है। खासकर मोड़ वाले स्थानों में सडक़ उखडऩे लगी है। इससे मोड़ वाले इलाके में आए दिन सडक़ दुर्घटनाएं भी हो रही है। सडक़ की गुणवत्ता के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होते हैं। क्योंकि उन्हें समय रहते उसकी मॉनिटरिंग करनी होती है। लेकिन विभागीय अधिकारियों को अपने चेंबर से निकलने की फुर्सत नहीं होती। जिसका फायदा ठेकेदार उठाना चाहता है और मनमर्जी से गुणवत्ता को ताक में रखकर जैसे तैसे सडक़ निर्माण करा देता है।
दस गांवों की सीमा को जोड़ती है सडक़
अफरीद से बम्हनीडीह तक बनी तकरीबन 27 करोड़ की सडक़ में तकरीबन 10 गांव के लोग आवागमन करते हैं। जिसमें अफरीद, मुड़पार, पचोरी, भवरेली, भवरमाल, झर्रा, लखाली, लखुर्री होते हुए बम्हनीडीह तक पहुंचती है। इस सडक़ में भारी वाहनों के गुजरने से सडक़ समय से पहले खराब हो रही है। समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो आगे चलकर और खराब होते जाएगी। जिससे ठेकेदार को और नुकसान उठाना पड़ेगा।
अफरीद-बम्हनीडीह सडक़ अभी से उखडऩे लगी है इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो ठेकेदार को बोलकर सडक़ की मरम्मत कराई जाएगी।
-केपी लहरे, ईई पीडब्ल्यूडी





















