28 लाख की हेराफेरी के मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर, विद्यालय प्रबंधन का सहयोग न करना संदिग्ध

चरचा कालरी। सरस्वती शिशु मंदिर चरचा कालरी में हुई 28 लाख की हेरा फेरी के संबंध में विद्यालय प्रशासन द्वारा सहयोग न करने से विद्यालय प्रशासन पर सवालिया प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं इस हेरा फेरी का सबसे मुख्य पहलू यह है कि विद्यालय प्रबंधन ने कंप्यूटर ऑपरेटर पर 2808490/ रुपए की हेरा फेरी की शिकायत का मामला चर्चा थाने पंजीबद्ध कराया किंतु इतनी भारी रकम के गायब होने के संबंध में किसी प्रकार के विस्तृत विवरण या जानकारी नहीं दी जबकि विद्यालय प्रबंधन को जिन तारीखों में हेरा फेरी की गई है उसकी पूर्ण जानकारी चर्चा थाने को दी जानी चाहिए थी चर्चा थाने ने शिकायतकर्ता विद्यालय प्रबंधन द्वारा 9 दिसंबर 2024 को 28 लाख रुपए की हेरा फेरी के संबंध में लिखित आवेदन दिया गया था इस घटना को बीते अब लगभग एक महीने हो गए हैं इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन द्वारा पुलिस प्रशासन को पूर्ण विवरण न देना बेहद सोचनीय व संदिग्ध है सूत्रों के अनुसार विद्यालय प्रबंधन द्वारा बार-बार समय की मांग की जा रही है यह कहा जाता है कि हमारे विभाग के शीर्ष लोग आएंगे उनके द्वारा पूर्ण जानकारी दी जाएगी ,यह गौरतलप है कि जब जानकारी नहीं है तो थाने में रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई गई ,विद्यालय प्रबंधन 28 लाख 8490 रुपए की हेरा फेरी की शिकायत करता है इसका मतलब उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि यह राशि कब-कब और किस जगह हेरा फेरी की गई है, इस संबंध में चर्चा पुलिस को भी पूरी जानकारी लेकर रिपोर्ट दर्ज करना चाहिए था,विद्यालय प्रशासन की वर्तमान कार्यशैली से प्रतीत हो रहा है कि विद्यालय प्रशासन लाखों रूपों की हेरा फेरी की इस गंभीर घटना के साक्ष्य को छुपाने की कवायत कर रहा है, या तो फिर मूल अपराधियों को बचाने के प्रयास में है।
सरस्वती शिशु मंदिर के बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष रामसागर द्वारा 28 लाख रूपयो की हेरा फेरी के संबंध में की गई शिकायत पर पुलिस ने विद्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर अभिजीत प्रधान को हिरासत में लेकर थाने में बंद कमरे में बयान लिया गया वह वीडियो भी बनाया गया है जिसमें सूत्र के अनुसार अभिजीत प्रधान के द्वारा कुछ लोगों के नाम भी बताए गए हैं 28 लाख रूपों की हेरा फेरी के मामले में एफआईआर दर्ज होने के एक महीने बात भी आरोपियों तक पहुंचने में चर्चा पुलिस क्यों पीछे है, क्या दबाव बस सक्षम कार्रवाई नहीं हो पा रही है लाखों की इस हेरा फेरी में सिर्फ एक छोटी मछली को पडक़र अपनी पीठ थपथपाना उचित नहीं है इस प्रकरण के मुख्य और अन्य सहयोगी खुलेआम घूम रहे हैं जिन पर वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए। सरस्वती शिशु मंदिर चर्चा के तत्कालीन प्रबंध द्वारा मनमानी करते हुए आरोपी अभिजीत प्रधान को लिपिक अकाउंटेंट और कंप्यूटर ऑपरेटर तीनों कार्यों के लिए अधिकृत कर दिया गया था इस हेतु तत्कालीन प्रबंधक के द्वारा लिखित में आदेश जारी किया गया था जिसमें यह उल्लेखित था कि प्राचार्य को विद्यालय के वित्तीय लेनदेन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होगा इस वजह से अभिजीत प्रधान मनमाने तरीके से हेरा फेरी करने लगा ,7 वर्षों तक एक ही व्यक्ति को तीनों कार्य देना निश्चित ही तत्कालीन शाला प्रबंधन का सुंनियोजित षड्यंत्र प्रतीत होता है इसके अतिरिक्त इतनी लंबी अवधि में विद्यालय का ऑडिट रिपोर्ट में किसी भी हेरा फेरी को उल्लेख ना होना भी अपने आप में सवालिया प्रश्न चिन्ह है विद्यालय के तत्कालीन प्रबंधन द्वारा विद्यालय के प्राचार्य को वित्तीय अनियमितताओं की जांच न करने देना भी दुर्भाग्यपूर्ण और सुनियोजित प्रतीत होता है इस प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि विद्यालय प्रबंधन को 2 वर्ष पूर्व हेरा फेरी की जानकारी थी तब पुलिस में रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराई गई ,क्या पुलिस में रिपोर्ट न करने हेतु किसी व्यक्ति विशेष का दबाव था।
सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय चर्चा के बाल शिक्षा समिति के कोषाध्यक्ष रामसागर सिंह ने दिनांक 9 दिसंबर 2024 को थाना में उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराई उनकी शिकायत के अनुसार अभिजीत प्रधान जो पूर्व में उक्त विद्यालय में लिपिक अकाउंटेंट और कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था में वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 के दौरान छात्रों से शुल्क वसूल कर लगभग 28 लाख 8490 रुपए की राशि का गबन किया है अभिजीत प्रधान ने छात्रों से शुल्क वसूलते समय छल कपट और धोखाधड़ी करते हुए रसीद बुक का दुरुपयोग किया और विद्यालय को इसकी जानकारी नहीं होने दी यह राशि उसने अन्य लोगों के सहयोग से गबन कर ली है इस मामले में थाना चर्चा द्वारा अपराध क्रमांक 282 / 24 धारा 408, 420, 467, 468, 120 बी भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज कर विवेचना की गई देखना यह है कि कोरिया जिले के नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक के द्वारा इस गंभीर हेरा फेरी के मामले में संज्ञान लेकर किस तरह की कार्यवाही को अंजाम दिया जाएगा।

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