नौ दिन में चार बार कोरोना जांच, सभी रिपोर्ट पॉजिटिव, पीडि़त परेशान
कोरबा/दीपका. वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से लोग काफी टेंशन में हैं। मामला तब और जटिल हो जाता है जब किसी पीडि़त की हर बार होने वाली जांच कोरोना पॉजिटिव आए। एसईसीएल का एक सुरक्षा निरीक्षक इसी के चलते परेशान है। अब उसने अपोलो प्रबंधन से खुद को डिस्चार्ज करने कहा है ताकि बेहतर माहौल में वह ठीक हो सके।
सबसे खास बात यह है कि पीडि़त की स्थिति सामान्य हो चली है लेकिन अज्ञात कारणों से उसकी अब तक की एक भी रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आई है। एसईसीएल गेवरा परियोजना में सुरक्षा निरीक्षक के पद पर कार्यरत घनश्याम सूर्यवंशी के साथ इस तरह की समस्या बनी हुई है। नवंबर के पहले सप्ताह में उसे असहज महसूस होने पर एनसीएच गेवरा में उपचार दिया गया। ऐसा प्रतीत हुआ कि वह कोरोना संक्रमित हो सकता है, इस आधार पर एनसीएच प्रबंधन ने उसे यहां से अपोलो बिलासपुर रेफर कर दिया। खबर के अनुसार 5 नवंबर से सूर्यवंशी का उपचार अपोलो में चल रहा है। तब से अब तक 9 दिन की अवधि में सूर्यवंशी की चार बार स्वास्थ्य जांच हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी जांच पॉजिटिव आई। इससे संबंधित व्यक्ति परेशान हो गया। यही नहीं इस तरह की जांच रिपोर्ट से अस्पताल प्रबंधन भी हतप्रभ है। वजह यह है कि वर्तमान स्थिति में एसईसीएल का यह कर्मी स्वास्थ्य के मामले में काफी बेहतर हो चुका है। ऐसे में कोई कारण शेष नहीं बचता कि वह अपोलो में उपचार प्राप्त करे। उसने अपनी समस्या अधिकारियों के अलावा कई लोगों से शेयर की। इसके साथ उसने आज ही अपोलो प्रबंधन से खुद को डिस्चार्ज करने को कहा। वह चाहता है कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के मामले में शेष बची आइसोलेशन की अवधि घर में ही बिताएगा। यही इस समस्या का सबसे उपयुक्त विकल्प हो सकता है।
ढेलवाडीह को कंटेनमेंट जोन से किया मुक्त
काफी संख्या में कोरोना संक्रमित मिलने पर एसईसीएल कोरबा क्षेत्र की भूमिगत परियोजना ढेलवाडीह के कालोनी को कंटेनमेंट जोन बनाया गया था। इसके साथ ही कोयला खनन के लिए कर्मियों की अलग व्यवस्था की गई थी। निर्धारित अवधि पूरी होने के साथ संबंधित क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन से मुक्त कर दिया गया है। एसईसीएल प्रबंधन ने बताया कि आवासीय परिसर पूर्व की तरह संचालित हो रहा है और कोयला खदान में श्रम शक्ति की तय क्षमता का उपयोग किया जा रहा है।