बदनाम करने का षड्यंत्र
कोरबा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अरसे से रेत घाटों के साथ-साथ अन्य हिस्सों में सरकारी कार्रवाई जारी है। इसमें निकासी और परिवहन के उन मामलों में कार्रवाई की जा रही है जो प्रतिबंध के बावजूद चल रहे हैं। इधर तरदा क्षेत्र में 70 टन रेत जब्त करने की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। अनुज्ञाधारी राजेंद्र पांडेय ने इस पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जिस हिस्से में रेत भंडारण के विस्तार की अनुमति खुद खनिज विभाग ने दी है, वह अवैध कैसे हो सकता है।
उन्होंने कार्रवाई को लेकर वीडियो जारी करते हुए प्रक्रिया पर सवाल खड़े किये और कहा कि विपक्षी दल से संबंध रखने के कारण उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। एक दिन पहले तरदा में दो नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर 70 टन रेत जब्त की, इस तरह की खबरें प्रसारित हुई हैं। इसके बारे में उन्हें उस समय जानकारी नहीं दी गई। इस बारे में जब तहसीलदार से पूछताछ की गई तो उन्होंने शुल्क पटाने को कहा। पांडेय का कहना है कि उन्होंने अधिकारी को साफ कह दिया कि जिस हिस्से में रेत भंडारण के लिए उन्होंने अनुमति और विस्तारित क्षमता के लिए अलग से अनुमति ले रखी है और रायल्टी भी उनके पास है। ऐसे में कार्रवाई और पेनाल्टी का आधार क्या। उन्होंने यह भी कहा कि जो खबरें आई हैं उनमें दस्तावेज पेश करने को कहे जाने की बात वर्णित है, यह भी समझ से परे है। अगर दस्तावेज देखना ही था तो आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी को सार्वजनिक करने की जल्दबाजी क्यों की गई। पांडेय ने उप संचालक खनिज के द्वारा 6 जून 2020 को आदेश क्रमांक भी उपलब्ध कराया है जिसमें तरदा के संबंधित हिस्से में पूर्व रेत भंडारण क्षमता 1050 टन को बढ़ाकर 4050 टन करने की अनुमति विभाग के द्वारा उपलब्ध कराई गई है। इस स्थिति में रेत का अवैध भंडारण कैसे हो गया। जिला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रहे राजेंद्र पांडेय इस कार्रवाई से खफा हैं। जिस तरह से यह सब हुआ उससे व्यक्ति विशेष की छवि खराब करने का प्रयास किया गया। इसके लिए वे आगे की लड़ाई लडऩे की मानसिकता में है। इस सिलसिले में तरदा में कार्रवाई करने वाले नायब तहसीलदार पंचराम सलामे से कई मौकों पर संपर्क किया गया लेकिन फोन रिसिव नहीं हुआ।
खनिज विभाग की भूमिका आखिर क्या
सबसे बड़ी बात यह भी है कि कोरबा जिले में आखिर खनिज विभाग की भूमिका किस तरह की रह गई है। खनिज से संबंधित मामलों में हर तरह की कार्रवाई के लिए यह विभाग स्वतंत्र होता है, इस तरह की धारण बनी हुई है लेकिन कोरबा जिले में खनिज विभाग के हाथ बांध दिए गए हैं। ऐसा कहा जाने लगा है। बीते कुछ दिनों से हो रही कार्रवाई से यही पता चलता है। दूसरे विभाग के अधिकारियों की सीधी दखल ऐसे मामलों में किये जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है। यही कारण है कि खनिज से जुड़े मामलों में विभाग के अधिकारी और निरीक्षकों ने मौन व्रत धारण कर लिया।

देखिए वीडियो..