
जांजगीर। ग्राम पोड़ीदल्हा में शासकीय हैंडपंप के पास गड्ढे में डूबने से एक बालक की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने पीडि़त परिवार को राहत दी है। हाई कोर्ट ने कलेक्टर जांजगीर-चांपा द्वारा मुआवजा आवेदन खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही राजस्व पुस्तक परिपत्र के अनुसार 4 लाख रुपए की मुआवजा राशि 60 दिन के भीतर प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता शिवानंद धीवर के पुत्र की 16 जुलाई 2020 को शासकीय हैंडपंप के पास बने गड्ढे में डूबने से मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद पुलिस द्वारा मर्ग जांच की गई, जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी डूबने से मृत्यु की पुष्टि हुई। तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी की जांच में भी घटना सही पाई गई। मृतक के पिता ने जांच रिपोर्ट के आधार पर राजस्व पुस्तक परिपत्र भाग-6 खंड-4 के तहत 4 लाख रुपए मुआवजा के लिए कलेक्टर के समक्ष आवेदन दिया था, लेकिन कलेक्टर ने आवेदन खारिज कर दिया। कलेक्टर के निर्णय से असंतुष्ट होकर उन्होंने अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि कलेक्टर का आदेश विधि सम्मत नहीं है और डूबने से हुई मृत्यु पर नियम अनुसार मुआवजा दिया जाना आवश्यक है। हाई कोर्ट ने मामले में राज्य शासन और कलेक्टर को नोटिस जारी किया। शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के बाद सुनवाई पूरी की गई। न्यायालय ने कलेक्टर का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि आदेश जारी होने की तिथि से 60 दिन के भीतर पीडि़त परिवार को संपूर्ण मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए।


















