बेड फूल बताकर डॉक्टर कर रहे मरीजों को अस्पताल से चलता

जांजगीर चंपा । जिला अस्पताल में बेड फूल होने का बहाना बनाकर मरीजों को डॉक्टर वापस लौटा रहे हैं। ज्यादा दबाव डालने पर रेफर करने तक की धमकी दिया जा रहा है। हालांकि वर्तमान में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ा है, लेकिन जिला अस्पताल के अलावा ड्रामा सेंटर खुल जाने से बेड व जगह भी बढ़ गई है। इसके बावजूद मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। रात में मरीजों की समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।100 बेड के जिला अस्पताल में पहले से संसाधन, स्टाफ व सुविधा में काफी विस्तार किया गया है। जिला अस्पताल के बगल में ही ड्रामा सेंटर भवन बनाया गया है। पहले यह कोरोना अस्पताल था, लेकिन अब इसे आम मरीजों के लिए खोल दिया गया है। जहां आज भी अत्याधुनिक मशीनों से लैस है। इसके अलावा पहले से जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर भी मौजूद होंगे। शासन लगातार हर मरीजों को खासकर गरीब तबके के मरीजों को इलाज मिले कहकर लाखों रुपए पानी की तरह पैसे बहाकर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा का विस्तार कर रहे हैं। लेकिन वास्तविकता में देखा जाए तो इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जिम्मेदार डॉक्टर अपना परेशानी से बचने के कारण मरीज को रेफर या घर लौटा दे रहे हैं। खासकर जिला अस्पताल में रात में आने वाले मरीज भगवान भरोसे हैं। कुछ ऐसा ही नजारा जिला अस्पताल में रात को देखने को मिला। रात करीब 11 बजे स्नैक बाइट का दो से तीन केस व एक टीबी का मरीज पहुंचा। रात ड्यूटी में उपस्थित डॉक्टर द्वारा मरीजों को देखा गया, प्राथमिक उपचार किया गया लेकिन इसके बाद अपनी बला डालने के लिए मरीज के परिजनों को बोल दिया गया कि अभी अस्पताल में बेड ही उपलब्ध नहीं है। इसलिए ज्यादा सीरियस नहीं आप लोग वापस चले जाओ बोल दिया। जबकि टीबी का मरीज सीरियस कंडीशन में अस्पताल पहुंचा था। इसी तरह अन्य डायरिया, स्नैक बाइट के मरीजों को भी बेड नहीं होने के कारण बाहर ही बैठा दिया गया था। थक हार मरीज वापस अपने घर लौट गए। लेकिन उनको डॉक्टर द्वारा एक बेड उपलब्ध नहीं कराया जा सका। जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जरूरी होने पर बरामदे में या अन्य जगह बेड का व्यवस्था किया जाता है।

RO No. 13467/11