आध्यात्म,पुरातत्व और जन आस्था को खुद में समेटे रेणुका नदी पूरे उफान पर

ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि,माता रेणुका का महल और भगवान परशुराम जी का जन्म
कोरिया। बैकुंठपुर सरगुजा, जिला (अंबिकापुर)के मतरिंगा पहाड़ी से निकलती है। बलरामपुर जिला से होते हुए सोन नदी में मिल जाती है,यह नदी सरगुजा की जीवन रेखा कहलाती है इस नदी पर यूपी के मिजऱ्ापुर जिला में सरदार वल्लभपंत सागर बांध बनाया गया है। इसकी सहायक नदियों में सूर्या,महान, मोरन,गोबरी,दबरिया,घुंघुता आदि नदियों है।रेणुका नदी पर रकशगंडा जलप्रपात है। इसके अलावा इस नदी के किनारे महेशपुर(सरगुजा) प्राचीन स्थल स्थित है। रेणुका नदी को रिहंद नदी,रेड नदी अरण्य नदी आदि नामों से भी जाना जाता है। मतरिंगा पहाड़ से निकलने वाली रेण नदी का नाम परशुराम की माता रेणुका के नाम पर ही पड़ा है।देवगढ़ में परशुराम का आश्रम माने जाने वाले स्थान पर प्राचीन मंदिर के कुछ अवशेष भी मिले हैं।छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में घने जंगलों के बीच स्थित कलचा गांव में स्थित एक ऑर्कियोलॉजिकल साइट है जिसे शतमहला कहा जाता है। मान्यता है कि जमदग्नि ऋषि की पत्नी रेणुका इसी महल में रहती थीं और भगवान परशुराम को जन्म दिया था। कलचा गांव देवगढ़ धाम से महज दो किलोमीटर दूर है और उस पूरे क्षेत्र में ऋषि-मुनियों के इतिहास से जुड़े कई अवशेष बिखरे पड़े हैं। हरे-भरे जंगलों और पहाड़ों से घिरा छत्तीसगढ़ का सरगुजा क्षेत्र प्राचीन काल के दंडकारण्य का वह हिस्सा है। सूरजपुर की मुख्य नदी रेहर और महान नदी है। यहां पर आपको प्राकृतिक सौंदर्य देखने के लिए मिलता है। सूरजपुर पहले सरगुजा जिले का हिस्सा था। बाद में यह अलग होकर सूरजपुर जिले के रूप में अस्तित्व में आया।रेण नदी के उद्गम स्थल मतरिंगा पहाड़ से महेशपुर तक का वनाच्छादित क्षेत्र प्रागैतिहासिक काल और ऐतिहासिक काल के कई तरह के पुरावशेषों को अपने में समेटे हुए है. रियासत कालीन प्रकाशित पुस्तकों में प्राचीन स्थल तथा शैव धर्म के आस्था स्थल के रूप में महेशपुर का उल्लेख है. ब्रिटिश पुराविदों और अन्वेषकों की दृष्टि से यह स्थल ओझल रहा है. बहुत लंबे निरीक्षण और उपलब्ध अवशेषों के आधार पर टीलों में दबी प्राचीन संपदाओं को प्रकट करने के उद्देश्य से महेशपुर में उत्खनन कार्य पर ध्यान केंद्रित किया गया है। छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियां/ सरगुजा और सूरजपुर के दर्शनीय स्थल।

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