
गाजियाबाद, 01 सितम्बर । पत्नी सरिता के ससुराल छोड़कर मायके चले जाने से पति अमित डागर के सिर पर पहले से ही भूत सवार था। जब पत्नी सरिता ने रक्षाबंधन के त्योहार पर बेटी को साथ लाने से इनकार कर दिया तो अमित बौखला गया। उसने मंगलवार शाम को चिरंजीव विहार स्थित घर पर बैठकर छोटे भाई नितिन डागर के साथ शराब पी। इसके बाद दोनों ने फोन कर अपने दोस्त अनुज उर्फ पालू को दुहाई से घर बुला लिया। तीनों ने जमकर शराब पी और सरिता का त्योहार खराब करने के लिए साजिश रचनी शुरू कर दी। तीनों के बीच सलाह बनी कि पत्नी के मायके में उसका भाई मनोज चौधरी उर्फ मोनू अकेला पुरुष बचा है। उसकी हत्या करने से पत्नी का त्योहार भी खराब हो जाएगा और परिवार को सहारा देने वाला भी कोई नहीं बचेगा। इसके बाद तीनों ने तय किया कि तहसील में जाकर ही उसकी हत्या की जाएगी। तीनों ने मंगलवार रात से बुधवार तक लगातार शराब पी। बुधवार सुबह अमित अपने ग्रेटर नोएडा स्थित आफिस गया और वहां अपना फोन छोड़कर आया। उसने पिता की ब्रेजा कार में नितिन व अनुज को साथ लिया और तहसील पहुंचकर हत्याकांड को अंजाम दे दिया। दैनिक जागरण ने पहले ही दिन इस बात का अंदेशा जता दिया था कि हत्या की साजिश एक दिन पहले रची गई। दैनिक जागरण की इस खबर पर मुहर लगी और आरोपितों ने गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को साजिश रचने की बात कबूल की है।आरोपित जीजा अमित डागर व उसका भाई नितिन डागर अधिवक्ता हैं। हापुड़ में हुई अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद बुधवार को तहसील में हड़ताल थी। इसके चलते दोनों को जानकारी थी कि तहसील में बुधवार को अधिक चहल-पहल नहीं होगी। इसके चलते तीनों आरोपित नशे की हालत में तहसील पहुंचे और अधिवक्ता साले मनोज चौधरी की हत्या कर दी।सरिता के ससुराल में आने और बेटी को भेजने से मना करने पर अमित डागर बौखलाया हुआ था। उसने पहले तो सरिता को फोन पर त्योहार बिगाडऩे की धमकी दी। इसके बाद उसने मनोज चौधरी की पत्नी कविता चौधरी के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उनका त्योहार खराब करने की धमकी दी।पत्नी सरिता और सलज कविता अमित की इस धमकी को हल्के में ले गए और उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यदि वह धमकी के बाद मनोज को आफिस जाने से रोक लेती या पुलिस से शिकायत करती तो शायद मनोज की जान बच सकती थी।अमित पर पूर्व में जानलेवा हमले समेत चार मामले दर्ज हैं। जबकि नितिन पर भी तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। श् पुलिस सूत्रों का कहना है कि हत्याकांड के बाद आरोपितों पर आने वाले समय में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।पुलिस जांच में पता चला है कि पूर्व में वर्ष 2008 में मनोज चौधरी और नितिन डागर ने तहसील में एक साथ प्रैक्टिस शुरू की थी। तब दोनों एक साथ एक ही चैंबर में बैठते थे लेकिन बाद में विवाद के चलते दोनों अलग-अलग चैंबरों में बैठने लगे थे।पुलिस का कहना है कि आरोपितों की तलाश में 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गईं। तहसील से लेकर विभिन्न मार्गों के कैमरे चेक किए गए। चिरंजीव विहार स्थित घर, दुहाई व हाइवे के कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद ही आरोपित पकड़ में आ सके। अमित डागर की शादी सरिता से वर्ष 2002 में हुई थी। शादी के बाद से ही दोनों के बीच विवाद रहने लगा था। समय-समय पर सरिता अपने मायके आकर रहने लगती थी। वर्ष 2010 में सरिता ने पति अमित, देवर नितिन, सास ओमवती व ससुर मदन सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीडऩ का मामला दर्ज कराया था लेकिन बाद में समाज के लोगों के बैठने पर दोनों पक्षों में समझौता हो गया था।पूछताछ में अमित ने पुलिस को बताया कि उसके पास वर्ष 2012 से तमंचा रखा हुआ था। यह तमंचा उसके एक दोस्त ने दिया था। पूर्व में उसकी मौत हो चुकी है। इस तमंचे से ही मनोज की हत्या को अंजाम दिया गया।



















