
जांजगीर – चांपा । जिला मुख्यालय के मुख्य मार्ग सहित गली – मोहल्लों और सड़कों में लगाई गई एलईडी लाइट बंद पड़ी हुई हैं। करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी शाम होते ही पूरा शहर अंधेरे में डूब जाता है। एक तरफ बीटीआई चौक से लेकर कचहरी चौक तक विवेकानंद मार्ग की आधे से अधिक खंभेकी लाइट खराब है या फिर बल्ब की रोशनी धीमी हो गई है जिसके चलते सड़क पर अंधेरा हैवहीं दूसरी तरफ सीसी रोड निर्माण के लिए सड़क को यहां से लेकर वहां तक एक से डेढ़ फीट तक खोद दिया गया है। जिसके कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ठेकेदार के द्वारा सुरक्षा इंतजाम किए बिना रात में भी काम कराया जा रहा है। नगर पालिका जांजगीर नैला के वार्ड के गली – मोहल्ले ही नहीं बल्कि शहर के मुख्य मार्गों में स्ट्रीट लाइट की रोशनी दिया तले अंधेरा की कहावत को चरितार्थ कर रही है। क्योंकि लाइट खराब होने पर मेंटनेंस का काम निजी कंपनी को ही करना है मगर लाइट खराब होने के बाद उसे बदलकर देने में कंपनी के द्वारा लापरवाही दिखाई जा रही है। स्थिति तो यह है कि जो लाइट खराब होने के बाद यहां से कंपनी में मरम्मत के लिए भेजी जा रही है, उसे कंपनी पांच – छह माह बाद जाकर वापस कर रही है। ऐसे में जहां की लाइट खराब हो रही है वहां महीनों तक अंधेरे जैसी स्थिति बन रही है। इधर नपा के अफसर भी कंपनी का काम होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। विवेकानंद मार्ग में इन दिनों शाम होते ही अंधेरा छा जा रहा है। यहां रोड डिवाइटर में लगे खंभों में एलईडी लगाई गई थी जो खराब हो गई हैं। आधे से अधिक खंभे की लाइट खराब है या फिर बल्ब की रोशनी पीली हो गई है जिसके चलते सड़क पर अंधेरा है। वहीं जिस खंभे की एलईडी लाइट ठीक है तो खंभों की ऊंचाई अधिक होने के चलते पर्याप्त रोशनी नीचे सड़क तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में कंपनी से जिस वाट की लाइट मिल रही है नपा के द्वारा उसे जहां- तहां लगाकर व्यवस्था बनाई जा रही है। इससे ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है। वहीं दूसरी तरफ विवेकानंद मार्ग में एक तरफ बीटीआई चौक से कचहरी चौक तक सीसी रोड निर्माण के लिए सड़क को एक से डेढ़ फीट तक ठेकेदार द्वारा खोद दिया गया है। ठेकेदार के द्वारा सुरक्षा इंतजाम किए बिना रात में भी काम कराया जा रहा है। जिसके कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। नगर पालिका के मुख्य सड़कों में जहां अंधेरे का साम्राज्य रहता है। वहीं वार्ड क्रमांक 17, 15 सहित अधिकांश वार्डों में दिन में भी स्ट्रीट लाइट जलती रहती है। इससे नगर पालिका को बिजली बिल का अनावश्यक बोझ उठाना पड़ रहा है। मगर जिम्मेदारों को इससे कोई सरोकार नहीं है। नगरीय प्रशासन मंत्री ने अंधोसंरचना मद से पांच करोड़ के विकास कार्यों की घोषणा की थी। जिसमें से 50 लाख रुपए शहर में बिजली व्यवस्था के लिए थी लेकिन उसमें भी पूरी राशि नहीं मिल पाई है। केवल 20 लाख रूपये की स्वीकृति मिली है। नगरपालिका के अधिकारियों का दावा है कि यह राशि मिलने के बाद शहर की यह समस्या दूर हो जाएगी। शीघ्र ही इस राशि से सड़कों में नई एलईडी लाइट लगाई जाएंगी । गली मोहल्लों में छाये अंधेरे के चलते इसका खामियाजा कई वार्ड पार्षदों को मोहल्लेवासियों के तानों के रुप में सुनना पड़ रहा है। किसी के घर के सामने खंभे की लाइट खराब होने पर बदला नहीं जा रहा है। पार्षदों को यही जवाब मिल रहा है जब कंपनी से नए लाइट मिलेंगे, बदलेंगे।












