नवरात्र पर प्रज्वलित होंगे मनोकामना ज्योति कलश

कोरबा। भले ही हर तरफ अलग-अलग आधार बताकर मंहगाई के स्टार को बढ़ा हुआ दिखाया जा रहा है लेकिन आस्था का क्षेत्र ऐसा है जहां महंगाई कुल मिलाकर नतमस्तक है। 15 अक्टूबर से शुरू हो रहे आश्विन नवरात्र को इसका उदाहरण माना जा सकता है। अकेले कोरबा जिले में हजारों की संख्या में ज्योति कलश परज्वलित हो रहे हैं। बड़ी हुई शुल्क के बावजूद भक्तों की संख्या में बढ़ोतरी बताती है कि महंगाई से इसका कोई लेना-देना नहीं है। पिछले वर्षों की तुलना में अबकी बार अलग-अलग क्षेत्र में विभिन्न कारणों से सामानों की कीमतें बढ़ी हैं। चाहे सामान लाखों का हो, हजारों का या फिर सैकड़ो का। इसलिए जीवन से संबंधित सभी क्षेत्र इससे प्रभावित हैं। यह भी सच्चाई है कि सरकारी सेक्टर में लगातार सुविधा बढ़ाई जा रही हैं और वह भी अलग-अलग स्तर पर। इन सब चीजों को अलग रख दिया जाए तो धर्म कर्म का क्षेत्र ऐसा है जहां पर लोगों की आस्था के आगे दूसरी चीज बिल्कुल नहीं टिकती। ऐसे में महंगाई भी कोई मसला नहीं रह जाता। कोरबा जिले के सर्वमंगला, सिद्धीदात्री मंदिर देवपहरी, वैष्णो दरबार, भवानी मंदिर, महिषासुर मर्दिनी चतुर्गढ़, मड़वारानी, कंकालिन मंदिर दादर खुर्द, वनसरा देवी करतला और और आदिशक्ति मंदिर पहाड़ गांव ऐसे स्थान है जहां पर इस वर्ष भी नवरात्र पर लगभग 20000 ज्योति कलश प्रज्वलित किए जा रहे हैं। पहले के वर्षों में जहां ज्योति कलश की एक यूनिट की राशि ?500 निश्चित थी अब वह बढ़कर 751 रुपए तक हो गई है। जबकि घृत ज्योति कलश के लिए आस्थावान लोगों को डेढ़ हजार रुपए अदा करने होंगे। इसके अलावा मंदिरों में कई प्रकार के अनुष्ठान किए जाने हैं जिनमें भी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लोगों की भागीदारी होना है। लोगों ने मुक्त हस्त से इस पर सहयोग करना जारी रखा है। जानकारी के अनुसार इस प्रकार के कार्यों में हर सीजन में बड़ी राशि खर्च की जाती हैं और ऐसे मामलों में महंगाई की दर को खारिज कर दिया जाता है। इस बार भी बात कुछ ऐसी ही है। भक्तों का कहना है कि मामला जब निजी आस्था से जुड़ा होता है तो फिर उसके आगे पीछे दूसरी चीज है पूरके हो जाती हैं ।

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