
नईदिल्ली, १८ अक्टूबर । उत्तरी जिले की साइबर सेल थाना पुलिस ने फर्जी कंपनियों के जरिए थोक कारोबारियों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर सरगना समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की निशानदेही पर ठगे गये करीब तीन लाख रुपये की कीमत के सामान आदि बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपितों में निहाल विहार का रहने वाला नूर मोहम्मद, पश्चिमी सागर पुर का रहने वाला मनीष सैमसन और निरंकारी कालोनी का रहने वाला धर्मवीर है।आरोपितों के पास थोक कारोबारियों से खरीदे गए 850 जोड़ी बैंडमिंटन रैकेट, 285 क्रिकेट बैट, 13 कैरम बोर्ड, 40 हेयर ड्रायर समेत अन्य सामान बरामद किया गया है। डीसीपी मनोज कुमार मीना के अनुसार, बुराड़ी के रहने वाले संदीप कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीडि़त की सदर बाजार में फैंसी फर्नीजर की थोक की दुकान है। उन्हें अप्रैल में इंडिया मार्ट के माध्यम से बड़ी संख्या में फर्नीचर की आपूर्ति का आर्डर मिला । संदीप ने सदर बाजार स्थित फर्म के गोदाम पर सामान पहुंचा दिया और बदले में फिरोज नाम के शख्स ने भुगतान का मैसेज दिखाया। लेकिन रुपये बैंक में जमा नहीं हुए तो पीडि़त को ठगे जाने का अहसास हुआ। इसके बाद उसने एफआईआर दर्ज कराई। साइबर थाने के एसएचओ की देखरेख में गठित टीम ने जांच शुरू की। पुलिस को टेक्निकल सर्विलांस और काल डिटेल्स के आधार पर पता चला कि इसमें निहाल विहार इलाके में छिपा हुआ नूर मोहम्मद शामिल था। इसके बाद आरोपित की पहचान की पुष्टि के लिए हवलदार सोनिका को कूरियर डिलवरी करने वाला बनाकर भेजा गया। फिर पुष्टि होने के बाद इंस्पेक्टर संदीप श्रीवास्तव की टीम ने शनिवार को छापा मारकर नूर को गिरफ्तार कर लिया। नूर की निशानदेही पर मनीष सैमसन और धर्मवीर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इनके कब्जे से सामान बरामद कर लिया गया। पुलिस ने 28 एटीएम कार्ड, 27 पहचान पत्र और 51 चेकबुक बरामद किए हैं।वर्ष 2020 से कर रहे फर्जीवाड़ा मनीष सैमसन निजी क्षेत्र के बैंक में सेल्स मैनेजर था। वह बैंक से कई कंपनियों की जानकारी और लोगों के पहचान पत्र निकालकर आरोपितों को मुहैया कराता था। इसी पर बैंक खाते खुलवाए और सिम आदि निकाले जाते थे। इसके बाद प्रमुख बाजारों में कार्यालय ढूंढऩे के बाद गिरोह का सदस्य अमन कपूर किराए पर लेने के लिए जाता था। फिर फर्जी कंपनी बनाकर इंडिया मार्ट पर पंजीकृत कारोबारियों से संपर्क कर उससे सामान अपने आफिस कम गोदाम पर मंगवाया जाता था। इसके बाद फर्जी भुगतान स्लिप या चेक द्वारा भुगतान किया जाता था। सामान आने के बाद ये लोग आनन फानन मे उसे लेकर फरार हो जाते थे। यह गिरोह वर्ष 2020 से इस ठगी कर रहा है। पुलिस आरोपितों के बैंक खाते से 1.67 करोड़ रुपये के लेनदेन की सूचना मिली है। साथ ही 50 से अधिक शिकायतें भी मिली है। जो उक्त गिरोह से जुड़ी हुई पाई गई हैं।





















