
नईदिल्ली, २८ अक्टूबर ।
केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री हरदीप पुरी ने कहा है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के चुनौतीपूर्ण दौर में शहरी परिवहन को लेकर हमने नीतिगत स्तर पर सही दृष्टिकोण अपनाया है, लेकिन हमें तात्कालिकता के आधार पर कहीं अधिक तेजी से आगे काम करना होगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं बनानी होगी।पुरी ने 16वें अर्बन मोबिलिटी कान्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में कहा कि तात्कालिकता की जरूरत इसलिए है, क्योंकि 2014 के पहले या तो शहरी परिवहन की बुनियादी समस्याओं को स्वीकार करने से इनकार किया गया या इसकी अनदेखी की गई। छोटे और मध्यम श्रेणी के शहरों में परिवहन का ढांचा मुख्य रूप से असंगठित प्रणाली पर टिका है, लेकिन यह पूरी तरह खराब नहीं है। मेट्रो, रैपिड रेल, ट्रेन और ई-बसों के साथ नई चुनौतियों का सामना करने के काम की शुरुआत कर दी गई है। हरदीप पुरी ने कहा कि आज स्थिति यह है कि एक करोड़ लोग मेट्रो में रोज सफर कर रहे हैं और यह संख्या हर दिन बढ़ रही है। यह केवल इसलिए नहीं बढ़ रही है कि नई-नई लाइनें स्थापित हो रही हैं, बल्कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लास्ट माइल कनेक्टिवटी बेहतर हो रही है। अगर सार्वजनिक परिवहन का ढांचा सशक्त, भरोसेमंद और किफायती रूप में लोगों के पास होगा तो लोग निजी वाहन से शहर के भीतर या एक शहर से दूसरे शहर में क्यों सफर करेंगे। शहरों में लोगों की सुविधा के साथ समस्या बनकर उभरे ई-रिक्शा के नियमन और उनकी मनमानी पर अंकुश लगाने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि दिल्ली में ई रिक्शा के संदर्भ में जो कुछ नजर आता है, वही स्थिति पूरे देश की नहीं है। परिवहन के ये माध्यम लोगों की सुविधा का जरिया बनते हैं। राज्यों को उन्हें दुरुस्त करने की पहल करनी होगी। केंद्रीय मंत्री ने पीएम ई-बस सेवा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह शहरी परिवहन की तस्वीर को बदल देगी। दस हजार बसों के साथ इसकी अभी केवल शुरुआत भर हुई है।मीडिया से बातचीत करते हुए पुरी ने यह उम्मीद भी जताई कि दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर की तरह दो अन्य कॉरिडोर दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर और दिल्ली-पानीपत पर काम तेज हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी सूचना है कि इनमें से एक कॉरिडोर को लेकर दिल्ली सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। ऐसे किसी कॉरिडोर पर काम आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने होते हैं।
अगर दिल्ली या कोई भी सरकार इन योजनाओं पर आगे बढ़ती है तो स्वाभाविक रूप से परियोजनाओं में तेजी आएगी।
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