
जांजगीर चांपा। देवउठनी एकादशी पर गुरूवार को गन्ने के मंडप में वैदिक रीति से तुलसी व शालिग्राम का ब्याह रचाया गया। पांच माह की निद्रा से भगवान विष्णु के जागने के बाद मांगलिक कार्य शुरू होंगे। देवउठनी पर्व को लेकर बाजार में दिन भर गहमा गहमी रही। देवउठनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त होगया। साथ ही शादी ब्याह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट गई। अब मांगलिक कार्यों की शुरूआत होगी। सभी एकादशी में श्रेष्ठ देवउठनी एकादशी पर सुबह से ही महिलाएं पूजा की तैयारी में जुट गई थीं। घरों के सामने रंगोली सजाई गई। रात में आटे से चौक बनाकर गन्ने व केले का मंडप तैयार किया गया। इसमें भगवान शालिग्राम व तुलसी को स्थापित कर विधिवत पूजा अर्चना की गई। साथ ही तेल व हल्दी लगाकर पंडितों ने साखोचार पढ़ा। वैदिक रीति से पूजा के बाद परिजनों व पड़ोसियों को प्रसाद केला व मिठाइयां बांटी गई। मान्यता अनुसार इस दिन पांच माह की निद्रा के बाद भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरूआत होती है। पर्व को लेकर एक दिन पहले से ही कचहरी चौक, बीटीआईचौक, कलेक्टोरेट मोड़ जांजगीर के सामने, चांपा के श्री कृष्ण गौशाला सहित अन्य स्थानों में गन्ने का बाजार सज गया था। इस दौरान गन्ना की खूब बिक्री हुई। इसके अलावा राछाभांठा, कटौद और नेगुरडीह से भी व्यापारी बिक्री के लिए गन्ना लेकर पहुंचे थे। इस बार अंबिकापुर से गन्ने की आवक अधिक नहीं होने के कारण स्थानीय गन्नो की भी खून बिक्री हुई। जिसके कारण लेगों को अधिक कीमत में गन्ना खरीदना पड़ा। पर्व को लेकर एक नग गन्ना 40 से 50 रुपए तक में बिका। श्रद्धालुओं ने रखा उपवास देवउठनी एकादशी के दिन श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखा और रात में तुलसी विवाह किया। प्रबोधनी एकादशी को शालिग्राम, तुलसी एवं शंख की पूजा कर लोगों ने पुण्य पुल प्राप्त किया। इसके बाद फलाहार किया। यादवों की देवारी शुरू देवउठनी के साथ यादवों की देवारी शुरू होती है। अब शहर से लेकर गांवों में रावत नाच प्रारंभ हो जाएगा। यदुवंशियों ने गाय व बैलों के गले में सुहाई बांधकर किसानों को आशीर्वाद दिया। पटाखों की रही धूम छोटी दीपावली के रूप में मनाई जाने वाली देवउठनी एकादशी की शाम देवताओं व गन्ने की पूजा अर्चना के बाद बच्चों ने आतिशबाजी की। छोटे बच्चों ने जहां फूलझड़ी, अनार, लाइट जलाया।




















