
उत्तरकाशी। सिलक्यारा सुरंग में खोज-बचाव अभियान का 13वां दिन भी इंतजार के साथ खत्म हुआ। सुरंग में फंसे श्रमिकों के स्वजन सुबह से लेकर शाम तक अपनों के बाहर आने का इंतजार करते रहे।प्रशासन को भी उम्मीद थी कि शुक्रवार की शाम व रात तक सभी श्रमिक सकुशल निकाल लिए जाएंगे, लेकिन अभियान में आ रही अड़चनें भी स्वजन और खोज-बचाव टीम के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं। हर सुबह उम्मीद के साथ शुरू होती है और बेवसी व इंतजारी में ढल जाती है।बिहार के बांका जिले की रजनी शुक्रवार सुबह उम्मीद के साथ सिलक्यारा पहुंचीं। रजनी को उम्मीद थी कि सुरंग में फंसे उनके पति विरेंद्र शाम तक सकुशल बाहर आ जाएंगे। इसी इंतजार में शाम के आठ बज गए, लेकिन…। उदास भाव में रजनी कहती हैं कि वह आठ दिन पहले अपनी जेठानी व जेठ के साथ बिहार से सिलक्यारा आई थी, इसके बाद से रोज होटल से सिलक्यारा पहुंच रही हैं। प्रशासन और खोज-बचाओ अभियान से जुड़े अधिकारी भी हर दिन यही भरोसा दिलाते हैं कि अभियान आज समाप्त हो जाएगा। ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी केवल उन्हें दिलासा दिला रहे हैं। रजनी की जेठानी सुनीता कहती हैं कि समय भी उनके धैर्य की परीक्षा ले रहा है। बस! संतोष इस बात का है कि सुरंग में उनका देवर ठीक है। हर दिन अधिकारी बात तो करवा देते हैं, पर बिना उसे देखे तसल्ली कहां होने वाली है।




















