
राजौरी, २३ दिसम्बर । आतंकी समूह पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों में पुंछ आतंकी हमले में अमेरिका निर्मित एम4 राइफलों का इस्तेमाल दिखाया गया है। पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट ने पुंछ आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें चार सैनिक बलिदान हुए थे।आतंकियों ने सोशल मीडिया पर हमले वाली जगह की तस्वीरें भी जारी की जिसमें अत्याधुनिक अमेरिका निर्मित एम कार्बाइन असॉल्ट राइफलों के इस्तेमाल को दिखाया गया है। एम4 कार्बादन राइफल को 1980 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में विकसित किया गया था और यह करीब से हमला करने में सबसे उत्तम राइफल मानी जाती है। इस राइफल में स्टील की गोलियों का उपयोग भी होता है। स्टील की गोलियों से वाहनों को बड़ी आसानी से भेदा जा सकता है। इसके साथ साथ यह बुलेट पु्रुफ जैकेट को करीब से पार कर सकती है। पीएएफएफ के आतंकियों ने हमला करने के बाद फोटो अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है उसमें सेना के ट्रक के पास आतंकी के हाथ में एम4 कार्बाइन राइफल की बैरल नजर आ रही है।जिससे यह बात साफ है कि आतंकियों ने इसी राइफल से इस हमले को अंजाम दिया है। इससे पहले भी राज्य में आतंकी किसी बड़े हमले के लिए इस तरह की राइफल का उपयोग कर चुके है। पीएएफएफ आतंकी संगठन अनुच्छेद 370 के हटने के बाद वजूद में आया। सुरक्षा एजेंसियां इसे जैश-ए-मुहम्मद का ही एक गुट मान कर चल रही है। पीएएफएफ ने राजौरी व पुंछ में सभी बड़े आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली है। जिससे यह बात साफ है कि राजौरी व पुंछ दोनों जिलों में पीएएफएफ अपनी जड़ों को मजबूत कर चुका है। हमलों को अंजाम सूत्रों का कहना है कि पाक की खुफिया एजेंसी के साथ साथ आतंकी संगठनों ने पिछले कुछ समय में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त आतंकियों को राजौरी पुंछ में सीमा पार से भेजा है। इन आतंकियों को खास दिशा निर्देश जारी किए गए है कि वह दूरदराज व सुनसान क्षेत्रों में सेना के जवानों के ऊपर हमले करे। इन हमलों को अंजाम देने के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स का पूरा सहयोग आतंकियों को मिल रहा है और मद्दगारों को इसके लिए मोटी रकम भी दी जा रही है। इस रकम को पहुंचने के लिए कुछ एजेंट भी सक्रिय है जो सीमा पार से आने पर ड्रग को बेचकर पैसा जमा कर रहे है और उस पैसे में से कुछ पैसा आतंकियों के मद्दगारों तक पहुंचा रहे है। हमले में शामिल आतंकियों ने वाहन का उपयोग किया है। अब आतंकी किस वाहन में जंगल तक पहुंचे इसकी जांच में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से जुट चुकी है। सूत्रों का कहना है कि इससे पहले भी राजौरी व पुंछ दोनों जिलों में आतंकी एक जगह से दूसरी जगह तक आने जाने में वाहन का उपयोग कर रहे है।जो व्यक्ति आतंकियों को एक जगह से दूसरी जगह वाहन से ले जा रहा है वह पिछले काफी समय से आतंकियों के लिए ही कार्य कर रहा है। हो सकता है इसके लिए उसे मोटी रकम भी मिल रही हो, लेकिन अभी तक न तो इस वाहन का कोई सुराग मिल पाया है और न ही वाहन के मालिक है।




















