
उदयपुर। सरगुजा जिले के वन परिक्षेत्र उदयपुर अंतर्गत कई ग्रामों में जमीन हथियाने और कब्जा करने के चक्कर में हजारों पेड़ों की बलि दी जा रही है। हसदेव अरण्य के पेड़ों को बचाने के लिए लोगों के द्वारा धरना प्रदर्शन किया जा रहा है पर कोल प्रभावित क्षेत्र से बाहर के जंगल की सफाई भी हो रही है इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
ग्राम पंचायत उदयपुर के अल्कापुरी के नजदीक सतखंडा के पास एनएच पर एक एकड़ जंगल क्षेत्र में नए हरे वृक्षों को काटकर सफाया किया जा रहा है। छोटे हरे वृक्षों का सफाया किया जा रहा है। इस प्रकार हाथी विचरण क्षेत्र ग्राम जजगी, उपकपारा,महेशपुर, मानपुर, मनोहरपुर, दावा, सुखरी भंडार, लक्ष्मणगढ़, उदयपुर, सायर ,कुमदेवा,भकुरमा और उदयपुर वन परिक्षेत्र के कई जगह के जंगलों को काटकर घर बनाने के लिए और जमीन कब्जा करने के लिए सफाया किया जा रहा है द्य ताजा मामला ग्राम मनोहरपुर में एक व्यक्ति के द्वारा जंगल किनारे से जंगल सफाया करने में लगा हुआ है। बड़े हरे वृक्षों को काटकर मयार, कंडी, गोला और अन्य लकड़ी तैयार कर रहा है। वन विभाग को जानकारी मिली, मौके पर पहुंचे बीट गार्ड अमरनाथ राजवाड़े और उसके सहकर्मी ने डांट फटकार लगाई तथा हरे वृक्षों को काटने के लिए मना किया गया है। इसकी जानकारी दी गई और वहां पर कटे हुए लकड़ी को इक_ा करवा कर डिपो लाया गया है। लगातार क्षेत्र में कटाई की वजह से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। हाथियों का झुंड भी इसी जंगल में आतंक मचा रहा है फिर भी जंगलों का कटाई रुकने का नाम नहीं ले रहा है। गांव में जंगल कटाई करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। उदयपुर के उद्यान की नर्सरी के पास एक एकड़ जंगल को काटकर सफाई कर दिया गया है। पूरी तरह से हरे वृक्षों को काटकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वन विभाग अभी तक ऐसे व्यक्ति को तत्काल पकड़ कर कार्रवाई करना चाहिए किंतु अभी तक कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ हैद्य ग्राम उपकापारा के जंगल की नर्सरी को पूरी तरह से लोगों के द्वारा कब्जा कर लिया गया है जिसमें हर वर्ष फैंसिंग करने के लिए लाखों रुपये वन विभाग के द्वारा खर्च किया जाता है,फिर भी वन विभाग के कर्मचारियों के द्वारा अच्छे से देखरेख नहीं किया जाता और सारे फेंसिंग किए हुए कटीले तारों को उखाड़ कर ग्रामीणों के द्वारा ले जाया जा रहा है। आरोप है कि क्षेत्र के जिस करमकठरा जंगल को वन विभाग के द्वारा संरक्षण देना चाहिए उसे संरक्षण न देकर काटने वालों लोगों को संरक्षण दिया जाता है। इस वजह से लगातार वनों की कटाई जारी है। उदयपुर से सटे जंगल करमकटरा को बचाने के लिए भी लोगों को आगे आना चाहिए।यहां जंगल में सिर्फ हाथी ही विचरण नहीं करते सैकड़ो की संख्या में चीतल प्रजाति के वन्य जीव के साथ खरगोश और जंगली सूअर रहते हैं। वनों की कटाई के कारण वन्य जीव भी खतरे में पड़ गए हैं।






















