राम के अस्तित्व पर सवाल करने वाले इतिहास के हाशिए पर, डिकोलोनाईजेशन ऑफ इंडिया के विमोचन अवसर पर राजनाथ सिंह का संबोधन

नईदिल्ली, १४ जनवरी । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जिन्होंने राम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा किया था। उन्हें काल्पनिक चरित्र बताया था। अयोध्या में राम जन्मस्थान को मिटाने की कोशिश की थी। ऐसे लोगों को काल ने इतिहास के हाशिए पर फेंक दिया है। ऐसे में आजकल कुछ लोगों ने इतिहास के हाशिए पर जाने के डर से राम धुन गाना शुरू कर दिया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति थी कि राम के अस्तित्व, उनकी व्यापकता व सार्वकालिकता पर सवाल खड़ा करने वाली जमात भी आज राम नाम जपने को मजबूर हो गई है।वह डीयू के इंडोर स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में बलबीर पुंज की पुस्तक ट्रिस्ट विद अयोध्या डिकोलोनाईजेशन ऑफ इंडिया के विमोचन अवसर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अयोध्या को देश के सांस्कृतिक, राजनैतिक और सामाजिक मूल्यों का ‘नाभिकीय केंद्र’ बताते हुए कहा कि राम जन्मस्थान का मंदिर नए भारत का प्रतीक होगा।जो देश को एक बार फिर से दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता देगा। यह दुनिया के लिए भी प्रेरणास्थल होगी। यह केवल कंक्रीट और पत्थरों से बना देश में एक और मंदिर नहीं होगा। बल्कि हमारी सनातनी आस्था का शिखर भी होगा। राम के आदर्श,लक्ष्मण रेखा की मर्यादा, लोकमंगल की शासन व्यवस्था, आतंक और अन्याय के नाश का ‘बीज केंद्र’ बनेगा। साथ ही नए भारत की गारंटी बनेगा जो दुनिया की आंख में आंख डालकर मुनादी करेगा कि राम थे, राम हैं और राम रहेंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि राम भारत की चेतना हैं। वह हमारी संस्कृति के ऐसे चरित्र हैं जिनपर जितना लिखा जाए कम है। उनके विविध आयाम हैं। वह सिर्फ राजा नहीं बल्कि लोकनायक हैं। भारतीय समाज के लोकतांत्रिक प्रतिनिधि हैं। समतामूलक समाज की अवधारणा सर्वप्रथम वही देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जन्मस्थान मंदिर की 500 साल की लड़ाई, हमारी सांस्कृतिक चेतना को कुचलने का षड्यंत्र था। इस षड्यंत्र के पीछे के चेहरों पर बलबीर पुंज ने अपनी इस नई किताब में रोशनी डाली है।विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि दुनिया के मार्गदर्शन का दायित्व हिंदुओं का है। जबकि श्रीराम समरसता के प्रतीक हैं, जो किसी मनुष्य को छोटा बड़ा नही मानते। राम राज में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा का प्रतिष्ठा होगी। डीयू के कुलपति प्रो.योगेश सिंह ने कहा कि श्रीराम भारत के प्राण है। वह त्याग की मूर्ति है जिन्होंने राजतिलक के अवसर पर सारा राजपाट त्याग दिया था। वे सदाचार, शील और दया के प्रतीक पुरुष हैं। पुस्तक के लेखक बलबीर पुंज ने कहा कि भारत के मानस से यदि श्रीराम को निकाल दिया जाए तो भारत अफगानिस्तान बन जाएगा और उनके लिए मनुष्यता सर्वोपरि है।डीयू डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) के अध्यक्ष प्रो.अजय कुमार भागी ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। कितबवाले प्रकाशन के प्रबंध निदेशक प्रशांत जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. वी एस नेगी ने किया।

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