
हरिद्वार, 0६ फरवरी । राम मंदिर आंदोलन संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि उन पर चरित्रहनन के जो आरोप लगाए गए थे, वह आखिरकार अदालत में बेबुनियाद साबित हुए।अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया है। लेकिन, इस तरह के अनर्गल आरोपों ने उन समेत षड्यंत्र में फंसे अन्य संत-महात्माओं के सार्वजनिक व राजनीतिक जीवन को पूरी तरह प्रभावित किया है। राजनीति में वह राम मंदिर निर्माण की मांग संसद में मुखरता से उठाने के लिए आए थे और वर्ष 2019 में अदालत से मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने पर उन्होंने सक्रिय राजनीति से हटने की घोषणा कर दी थी। यहां प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में स्वामी चिन्मयानंद ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय हमारी मांग और आंदोलन की सार्थकता को प्रमाणित कर रहे हैं। मुस्लिम आक्रमणकारियों ने अयोध्या, काशी, मथुरा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू धर्मस्थलों को बड़े पैमाने पर नष्ट करने का काम किया। हमारा आंदोलन इन सभी को पुन: हिंदू धर्मस्थल के तौर पर विकसित करने को था। प्रमुख तौर पर हम काशी, अयोध्या और मथुरा की मांग कर रहे थे, क्योंकि यह तीनों देश की प्रेरणा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि काशी और अयोध्या के बाद अब मथुरा की बारी है। स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि रामजन्म भूमि के लिए चले आंदोलन में तत्कालीन सरकारों ने अनेक बाधाएं पहुंचाईं। बावजूद इसके कड़े संघर्ष के बाद सफलता मिली और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि अंग्रेज शासनकाल में अयोध्या मुद्दे से जुड़े दोनों पक्ष समझौता करने को तैयार थे, लेकिन अंग्रेज सरकार ने हिंदू-मुस्लिम को लड़ाकर यह समझौता नहीं होने दिया। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानवापी मामले में जो तथ्य सामने आए हैं, उससे जल्द निर्णय हिंदुओं के पक्ष में होने की उम्मीद है। इससे मथुरा को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं। उन्होंने दूसरे पक्ष से जिद छोडऩे की अपील भी की।























