अधूरे निर्माणों को पूरा कराने पर जोर, ग्रामीण औद्योगिक पार्क से जुड़ी गतिविधियों पर कोहरा

कोरिया/बैकुंठपुर। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) प्रोजेक्ट ठप पड़ गया है। रीपा में स्वीकृत निर्माण कार्यों को छोड़कर यहां चल रही गतिविधियां ठंडी पड़ गई है। कोरिया व एमसीबी जिले में 10 गोठानों का चयन रीपा अंतर्गत किया गया था। यहां 20 करोड़ रुपए से इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की मंजूरी मिली थी। यानी एक प्रोजेक्ट पर करीब 2 करोड़ रुपए खर्च होने थे। जिले में रीपा के अधूरे निर्माण को तेजी से पूरा कराया जा रहा है, जबकि रूरल इंडस्ट्रियल पार्क, वीरान पड़े गोठानों की उपयोगिता को लेकर प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। कोरिया व एमसीबी जिले के रीपा प्रोजेक्ट की पड़ताल की। कोरिया के ग्राम आनी में गोठान वीरान पड़ा था। रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के शेड में ताला लगा हुआ था। अंदर किसी भी तरह की गतिविधियां नजर नहीं आई। गोठान में देखरेख के लिए भी कोई नहीं था। जानवरों के लिए बने नाद खाली पड़े थे। स्व सहायता समूह मशरूम शेड निर्माण, मुर्गी व बकरी पालन शेड बंद पड़ा था। बकरी शेड में पाइप व कबाड़ पड़े मिले। वहीं रीपा परिक्षेत्र में मसाला उत्पादन यूनिट, दूध, बेकरी व मिलेट यूनिट बंद मिला। परिक्षेत्र में सीसी सड़क बनाने का कार्य चल रहा है। पूछने पर यहां काम करने वालों ने कहा कि प्लांट में क्या होता है, क्या बनता है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, वहां कोई जिम्मेदार भी नजर नहीं आए। ग्राम आनी के रीपा प्रोजेक्ट में कृषि विज्ञान केंद्र सलका के दुग्ध यूनिट को शिफ्ट करने की तैयारी थी, लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद इन कार्यों पर विराम लग गया। रीपा प्रोजेक्ट की उपयोगिता को प्रदेश की साय सरकार कैसे सफल बनाएगी, इसे लेकर सरकार ने अब तक आदेश नहीं दिया है। आनी में रीपा क्षेत्र के आसपास वन विभाग ने पौधे लगाए थे। वह भी पानी सिंचाई के अभाव में पीले पड़कर सूखने लगे हैं। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद एमसीबी जिले के ग्राम पंचायत दुबछोला रीपा प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा किया गया। अधूरे भवन व बाउंड्रीवॉल का निर्माण पूरा कर इसे पंचायत के हैंडओवर कर दिए, लेकिन यहां बंद पड़ी यूनिट का अब क्या उपयोग होगा, यह पंचायत के अधिकारी व जनप्रतिनिधि नहीं बता पा रहे हैं। जिलेभर में रीपा प्रोजेक्ट की ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां यूनिट के लिए भवन तो बना दिए गए मगर उपयोगिता शून्य हो गई। ऐसे में सवाल यह है कि क्या रीपा के भवन भी गोठान की तरह वीरान पड़े रह जाएंगे। गार्ड रूम व कार्यालय भी खाली पड़ा था। इसी तरह जिला मुख्यालय के मझगवां प्रोजेक्ट में भी कई यूनिट बंद पड़ी हुई है। इन्हें शुरू नहीं किया जा सका। बकरी पालन, मुर्गी पालन व दूध यूनिट बंद पड़ी है। गोबर से पेंट बनाने व अन्य मशीनें भी बंद दिखी। हालांकि पंचायत के अफसरों का दावा है कि यहां सब ठीक है। प्रोजेक्ट बंद नहीं हुआ है। जनपद पंचायत बैकुंठपुर के सीईओ राधेश्याम मिर्झा ने कहा कि ग्राम आनी रीपा प्रोजेक्ट में कोदो व बेकरी यूनिट का संचालन किया जा रहा था। यूनिट क्यों बंद है, इसकी जानकारी लेंगे। उन्होंने कहा कि रीपा में अधूरे कार्यों को पूरा किया जा रहा है। आगे जिला पंचायत व सरकार के निर्देश पर कार्य होंगे। सीईओ ने कहा कि मझगवां में भी बंद यूनिट को वह दिखवाते हैं।

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