पॉक्सो का आरोपित पीडि़ता के गांव या शहर में पैरोल पर नहीं रह सकता, हाई कोर्ट का अहम फैसला

जयपुर, 01 मार्च । राजस्थान उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक फैसला सुनाते हुए कहा, पॉक्सो मामले का आरोपित उस शहर या गांव में पैरोल नहीं काट सकता, जिसमें पीडि़ता रहती है। आरोपित चाहे उसी गांव या शहर का निवासी हो। पॉक्सो के आरोपित को पैरोल दूसरी जगह काटना होगा। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश दिनेश मेहता और राजेंद्र प्रकाश सोनी ने एक आरोपित की याचिका पर यह फैसला सुनाया है। पॉक्सो मामले के एक आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। आरोपित ने उच्च न्यायालय में पैरोल की याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने आरोपित को 50 हजार रूपये के निजी बांड व 25 हजार रुपये की दो जमानत राशि पर 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया है।शर्त के अनुसार आरोपित पीडि़ता के गांव में नहीं जा सकेगा। भले ही उस गांव में उसका घर हो या परिवार रहता हो। आरोपित को पीडि़ता के गांव से बाहर ही पैरोल काटनी पड़ेगी। उच्च न्यायालय ने कहा, पीडि़ता और आरोपित के बीच संपर्क नहीं होना चाहिए। पीडि़ता जिस घटना को भूलना चाहती है आरोपित के सामने होने से उसे वह घटना फिर से याद आएगी।उल्लेखनीय है कि राजस्थान के नागौर जिले के कुचेरा गांव में सहीराम (35 साल) ने अपने घर के पास रहने वाली तीन साल की बच्ची के साथ पिछले साल दुष्कर्म किया था। वह अजमेर जेल में बंद है।

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