
जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय में भारी वाहनों से मुक्ति के लिए नैला रेलवे स्टेशन के कोल साइडिंग से कोयला लोड कर आने वाले वाहनों को शहर के बाहर से निकालने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाना आवश्यक है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने अंडरब्रिज के पास से बनारी होते हुए 6 किमी. सड़क बनाए जाने का प्रस्ताव शासन को डेढ साल पहले भेजा गया था। मगर इस प्रस्ताव को अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। जिसके चलते भारी वाहनों से जांजगीर नैला शहरवासियों को मुक्ति नहीं मिली है। हालांकि यातायात पुलिस ने रात 11 बजे तक शहर में भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया है। इसलिए दिन में कुछ राहत है। जिला मुख्यालय में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार होती है। रोज हजारों की संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं। एनएच का निर्माण अंतिम चरण में हैं और पीथमपुर में हाईलेबल ब्रिज बन जाने के बाद इस मार्ग पर आवाजाही शुरू हो गई है। हालांकि खोखसा में कुछ दूरी तक सड़क निर्माण नहीं हुआ है। मगर बेजाकब्जा हटाए जाने के बाद सड़क पर आवागमन शुरू हो गया है। इसके बाद भारी वाहन नगर के बाहर से ही निकल रहे हैं। मगर कोल साइडिंग नैला से कोयला लेकर आने वाले वाहन चांपा व बिलासपुर की ओर जाते हैं और येवाहन स्टेशन रोड से होते हुए नगर के विवेकानंद मार्ग और अकलतरा रोड से गुजरते हैं जो नगर का हृदय स्थल है। ऐसे में आए दिन दुर्घटना होती है। हालांकि सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक नो एंट्री रहती है। मगर देर रात वाहनों की इतनी लंबी कतार लगती है कि नैला से जांजगीर आना जाना कठिन हो जाता है। सड़क की स्थिति भी खराब हो रही है। ऐसे में दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। सालों बाद भी इस समस्या का निराकरण अब तक नहीं हो सका। नगर वासियों की परेशानी को देखते हुए भारी वाहनों को शहर से बाहर निकालने के लिए पीडब्ल्यूडी ने अंडरब्रिज नैला के पास से नहर पार में 6 किमी. सड़क बनाकर एनएच 49 से जोडऩे का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को डेढ साल भेजा था। इस प्रस्ताव के अनुसार सड़क की चौड़ाई 15 फीट होगी और लागत लगभग सात करोड़ होगा। इस सड़क के बन जाने से नगरवासियों को भारी वाहनों से मुक्ति मिल जाएगी। रेलवे स्टेशन व बलौदा की ओर जाने आने वालों के अलावा स्टेशन रोड में निवास करने वालों को भी इससे सुविधा मिलेगी। मगर इसके लिए जनप्रतिनिधि व उच्चाधिकारियों को यह प्रयास करना होगा कि पीडब्ल्यूडी के इस प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति मिल सके। सात माह से यह प्रस्ताव धूल खा रही है।जिला मुख्यालय में भारी वाहन नगर से गुजरते हैं तो ये परिवहन नियमों का पालन भी नहीं करते। बिना तिरपाल ढंके कोयला व राखड़ का परिवहन किया जाता है। इसके चलते धूल का गुबार उठता है और वाहनों के धुएं से भी लोगों को परेशानी होती है। सड़क पर पानी का छिड़काव कभी होता ही नहीं जिसके कारण दुकानदारों को भी अपना सामान पालिथीन का पर्दा लगाकर सुरक्षित करना पड़ता है।



















