
जानकारी जुटाकर व्हाट्सएप कॉल के जरिये दे रहे चपत
कोरबा। डिजिटल क्रांति के बढ़ते चरण के साथ साइबर की दुनिया में अपराध भी तेजी से बड़ा है और नए-नए अपराधियों की एंट्री हुई है इसका भरपूर नुकसान उन लोगों को हुआ है जिन्होंने अपने पास आए फोन कॉल पर विश्वास किया और बिना कुछ पुष्टि किए अहम जानकारी दे दी। बीते समय में पुलिस ने ऐसे मामलों में अपराधियों के कई गिरोह को बेनकाब किया है इसलिए अब ठगों ने नया तरीका खोज लिया है। वे लोगों के पास उनके किसी खास आदमी के गंभीर अपराध में फंसने के नाम से व्हाट्सएप कॉल करते हैं और फिर रकम ऐंठ लेते हैं। हालांकि लोगों की जागरूकता से ठगों की चाल नाकाम हो रही है।
जानकारी के अनुसार दिल्ली और हरियाणा की तरफ से साइबर ठगी का नया धंधा शुरू हुआ है। ठगी के कुछ मामलों में इसकी पुष्टि हुई है। ठगों की बोली भी बताती है कि वे किस इलाके से जुड़े है। कोरबा जिले में पिछले दिनों खरमोर क्षेत्र की डॉक्टर छाया गौतम के साथ ऐसी घटना हुई जिसमें मलेशिया से आए एक पार्सल के नाम पर उसे धमकी चमकी दी गई। दिल्ली पुलिस और सीबीआई का डर दिखाकर डॉक्टर से ठगी करने वाले व्यक्ति ने अलग-अलग किस्तों में 547000 रुपये झटक लिए। काफी देर के बाद छाया गौतम को एहसास हुआ कि मामला ऐसा कुछ था नहीं और उसे कुल मिलाकर ठंग लिया गया है। कोरबा की सिविल लाइन पुलिस ने इस प्रकरण में व्हाट्सएप कॉल करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 468, 469 और 388 के अंतर्गत ठगी व ब्लैकमेलिंग का प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। जिले में और भी स्थान पर साइबर ठग गिरोह की ओर से उनके व्हाट्सएप नंबर पर कॉल आए हैं और उन्हें प्रभाव में लेने की कोशिश की गई। कोरबा के मानिकपुर चौकी क्षेत्र के अंतर्गत रहने वाले एक व्यक्ति के व्हाट्सएप नंबर पर इसी तरह का कॉल ठग की ओर से आया। उसने स्मगलिंग का वास्ता देते हुए व्यक्ति को अपने प्रभाव में लेने का प्रयास किया और बताया कि निपटने के लिए थाना आना होगा और बहुत कुछ प्रक्रिया करनी होगी। साइबर ठग को शायद इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह जहां पर कॉल कर रहा है उसके भूगोल से अगला व्यक्ति पूरी तरह परिचित है । जानकारी प्राप्त करने की कड़ी में कॉलर से कई तरह के सवाल किए गए और उनके जवाब देने में संबंधित व्यक्ति नाकाम रहा। अंतत: पोलपट्टी खुलने और गाली सुनने के बाद ठग ने मान लिया कि हर किसी को कॉल कर झांसे में लेना और किसी का भी डर दिखाकर रकम वसूल करना इतना भी आसान नही।
आखिर कहां से मिल रहे नंबर
साइबर फ्रॉड के मामलों में अब सबसे बड़ा सामान लिया उत्पन्न हो रहा है कि इस कारोबार में लगे लोगों को संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल नंबर कहां से हासिल हो रहे हैं। मुख्य रूप से फ्रॉड के नए मामलों में लोगों को इस नाम से फोन कॉल किए जा रहे हैं कि उनके बेटे या बेटी मादक पदार्थ की तस्करी में फस गए हैं। इस प्रकार के कॉल आने से किसी भी अभिभावक का परेशान होना स्वाभाविक है। लेकिन इस दौरान हड़बड़ी करने के बजाय सतर्कता का प्रदर्शन करने से पूरा सच सामने आ रहा है। इन सब के बावजूद महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर लोगों से जुड़ी गोपनीय जानकारी आखिर गलत हाथों में कैसे पहुंच रही है।
























