हम न तो राजनीति में शामिल हैं, न ही किसी पार्टी को वोट देने को कहा, ममता के आरोपों को मठों के संतों ने किया खारिज

कोलकाता, २० मई ।
लोकसभा चुनाव में दो प्रमुख मठों के कुछ संतों पर भाजपा के पक्ष में काम करने से संबंधित बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों से उपजे विवाद के बीच दोनों धार्मिक संस्थाओं ने रविवार को दावा किया कि वे हमेशा ही राजनीति से दूर रही हैं और कभी किसी पार्टी के लिए वोट नहीं मांगा।तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता ने शनिवार को हुगली जिले में एक चुनावी रैली में दावा किया था कि रामकृष्ण मिशन व भारत सेवाश्रम संघ के कुछ साधु-संन्यासी सीधे तौर पर राजनीति और भाजपा के निर्देश पर काम कर रहे हैं, जिससे देश का सर्वनाश हो रहा है। बंगाल में स्थित दोनों प्रमुख मठों रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे केवल समाज की सेवा करने पर ध्यान देते हैं। हावड़ा के बेलूर में स्थित रामकृष्ण मिशन के वैश्विक मुख्यालय के एक वरिष्ठ संत ने कहा, हम आक्षेपों से दुखी और व्यथित हैं। हम किसी भी विवाद में फंसना नहीं चाहते हैं। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री सहित सभी क्षेत्रों से हजारों आगंतुक हमारे परिसर में प्रार्थना और ध्यान करने आते हैं। हमारे लिए सभी समान हैं। उन्होंने कहा कि हम लोगों के बीच धर्म और अध्यात्म के शाश्वत मूल्यों का प्रसार करने का प्रयास करते हैं। मेरी जानकारी के अनुसार, न तो मिशन और न ही हमारे किसी संत ने किसी को भी एक विशेष पार्टी को वोट देने के लिए कहा।वहीं, भारत सेवाश्रम संघ के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि चक्रवात से लेकर कोविड महामारी तक, हम हमेशा दूर-दराज के इलाकों में पीडि़तों की सहायता के लिए पहुंचे हैं। हम 107 साल पुराना संगठन हैं और हमारे संत देशभर में धर्मार्थ स्वास्थ्य क्लीनिक, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान चलाते हैं। हम न तो कभी राजनीति में शामिल थे और न ही भविष्य में होंगे। ममता ने आरोप लगाया था कि रामकृष्ण मिशन के कुछ संतों ने आसनसोल में श्रद्धालुओं से भाजपा को वोट देने को कहा था, जबकि भारत सेवाश्रम संघ के एक संत ने मुर्शिदाबाद के बहरमपुर में एक तृणमूल एजेंट को मतदान केंद्र पर बैठने से मना कर दिया था।
ममता के इन आरोपों की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को बंगाल में चुनावी रैलियों में उनपर जोरदार हमला बोला। पुरुलिया में पीएम ने कहा कि चुनाव के दौरान बंगाल की जनता को डराने-धमकाने वाली तृणमूल ने सारी हदें पार कर दी हैं। आज देश-दुनिया में इस्कान, रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ सेवा और नैतिकता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बंगाल की मुख्यमंत्री उन्हें खुले मंच से गालियां और धमकी दे रही हैं।
वे केवल अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए उन्हें धमकी दे रही हैं।

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