महामाया शक्कर कारखाना के संचालक मंडल को कार्यकाल समाप्ति के पहले भंग किया

सूरजपुर। जिले के ग्राम केरता स्थित मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना के संचालक मंडल को कार्यकाल पूर्ण होने के पहले ही भंग कर दिया गया है। सहकारिता विभाग के पंजीयक ने उक्त कार्रवाई की है। मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना का अध्यक्ष कलेक्टर सूरजपुर रोहित व्यास को नियुक्त किया गया है। उन्होंने अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण कर लिया है। शक्कर कारखाना के संचालक मंडल में कांग्रेस से जुड़े लोग शामिल थे। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही ऐसी कार्रवाई की संभावना थी। आखिरकार संचालक मंडल को। गड़बडिय़ों के आरोप पर भंग कर दिया गया।
मां महामाया शक्कर कारखाना की स्थापना के करीब 10 साल बाद संचालक मंडल का निर्वाचन साल 2019 में पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुआ था। कारखाना संचालक में शेयर धारक गन्ना किसानों की सहभागिता बढ़ाने के लिए संचालक मंडल के चुनाव में अध्यक्ष पद पर विद्यासागर सिंह, उपाध्यक्ष पद पर जितेंद्र दुबे और शुगर मिल एसोसिएशन दिल्ली के सदस्य के रूप में कुमार सिंहदेव निर्वाचित हुए थे। संचालक मंडल में 12 कार्यकारी सदस्यों का भी निर्वाचन किया गया था। संचालक मंडल का कार्यकाल अगस्त 2024 तक था। इसके पूर्व ही संचालक मंडल को पंजीयक, सहकारिता विभाग, रायपुर ने भंग कर दिया है। मां महामाया शक्कर कारखाना में अनियमितता की शिकायत पंजीयक सहकारिता विभाग रायपुर को की गई थी। शिकायत में बोरा भराई, अन्य टेंडर में नियमितता, प्लांट के संचालन के लिए कर्मचारियों की मनमानी भर्ती, मजदूरी भुगतान सहित अन्य शिकायतें शामिल हैं। इसे लेकर संचालक मंडल को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस का जवाब पंजीयक को भेजा भी गया था। संचालक मंडल के जवाब से असंतुष्ट पंजीयक ने संचालक मंडल को भंग कर सूरजपुर कलेक्टर रोहित व्यास को शक्कर कारखाने का अध्यक्ष का कार्यभार सौंप दिया है।
संचालक मंडल को भंग कर दिए जाने को राजनीति से प्रेरित कार्रवाई निरूपित कर संचालक मंडल ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। शुगर मिल एसोसिएशन दिल्ली के सदस्य कुमार सिंहदेव ने कहा कि, बोर्ड को उन आरोपों पर भंग किया गया है, जिसमें हम शामिल ही नहीं हैं। जिन शिकायतों पर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है वह तकीनीकी मामला है। प्रबंधन ने अपने स्तर से मामले की जांच कराई थी जिसकी रिपोर्ट भी है। यह कार्रवाई पूरी तरीके से राजनीति से प्रेरित है। ऑल इंडिया शुगर फेडरेशन के पूर्व सदस्य कुमार सिंह देव ने कहा कि तीन माह बाद चुनाव होना था। चुनाव में विपक्षी जीत नहीं सकते इसलिए शक्कर कारखाने में वे बैक डोर से एंट्री चाहते हैं। यह कार्रवाई विधि विरुद्ध और राजनीति से प्रेरित है। संचालक मंडल को भंग करने के आदेश के साथ ही हाई कोर्ट में कैविएट दायर करने से स्पष्ट है कि उनका पक्ष कमजोर है। जिन आरोपों पर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है वह पूरी तरीके से गलत है। प्रबंधन ने पहले ही उन आरोपों की जांच कराई थी। जिसकी रिपोर्ट भी है। उन्होंने कहा कि हम हाई कोर्ट जाएंगे और अपनी बात रखेंगे। वर्तमान सरकार से जुड़े लोग शक्कर कारखाने में बैकडोर से प्रवेश करना चाहते हैं, इसलिए यह कार्रवाई की गई है।

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