सीजेआई चंद्रचूड़ क्यों बन गए शाकाहारी, चमड़े से बना सामान खरीदना किया बंद

नईदिल्ली, 0६ अगस्त।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने दिल्ली हाईकोर्ट डिजिटल लॉ रिपोर्ट पोर्टल (ई-डीएचसीआर) न्याय के कार्यप्रवाह की पुनर्कल्पना करता है और न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। सीजेआई ने कहा कि यह हमें इस बात पर पुनर्विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है कि हम कानून को कैसे समझते हैं और उसका अभ्यास कैसे करते हैं।सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका तक पहुंच वास्तव में यह सुनिश्चित करती है कि भारतीय न्याय प्रणाली प्रभावी ढंग से लोगों की सेवा करे। इस दौरान सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अभय एस ओका, दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) मनमोहन और ई-डीएचसीआर समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उपस्थिति में पोर्टल का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के विभिन्न न्यायाधीश भी मौजूद थे। सीजेआई ने कहा कि वे दिन गए जब अधिवक्ताओं को लंबी कतारें झेलनी पड़ती थीं और दाखिल प्रक्रियाओं पर बहुमूल्य समय और ऊर्जा खर्च करनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल परिवर्तन बोझिल प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और सरल बनाता है।सीजेआई ने यह भी कहा कि ई-डीएचसीआर पोर्टल कानूनी पेशेवरों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों के लिए एक कीमती संसाधन होगा। इस दौरान एसीजे मनमोहन ने कहा कि ई-डीएचसीआर पोर्टल में प्रमुख मुद्दों और निष्कर्षों के साथ वर्ष 1968 से दिल्ली हाईकोर्ट के सभी रिपोर्ट किए गए निर्णय शामिल होंगे।हाईकोर्ट परिसर में शौर्य फाउंडेशन ट्रस्ट कैफे और सागर एक्सप्रेस का भी सीजेआई ने उद्घाटन किया।
इसे दिव्यांगों द्वारा चलाया जाता है। इस दौरान सीजेआई ने कहा कि अपनी दो दिव्यांग बेटियों की अपील पर हाल ही में वह शाकाहारी बन गए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने कहा था कि हमें क्रुरता मुक्त जीवन जीना चाहिए।उन्होंने यह भी कि वह और उनकी पत्नी रेशम या चमड़े का कोई उत्पाद नहीं खरीदते हैं। सीजेआई ने कहा कि वह हर दिन दिव्यांग लोगों के संपर्क में आते हैं और उन्हें एहसास होता है कि ऐसे व्यक्तियों में कितनी जबरदस्त क्षमता है। एजीजे ने कहा कि दिव्यांग लोगों को सशक्त बनाने से एक समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र बनेगा।

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