ममता सरकार को फटकार, मृतका की डिटेल हटाने का आदेश, सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ

नईदिल्ली, २१ अगस्त ।
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में डॉक्टर से दरिंदगी को भयावह घटना करार देते हुए देश भर में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के संबंध में संस्थागत विफलता पर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा दूसरों की स्वास्थ्य देखभाल मुहैया कराने वालों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जमीनी बदलाव के लिए देश एक और दुष्कर्म या हत्या का इंतजार नहीं कर सकता। कोर्ट ने देश भर के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का तंत्र स्थापित करने के लिए 14 सदस्यीय नेशनल टास्क फोर्स गठित की है। कोर्ट ने डॉक्टरों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए समाज और मरीजों के हित में काम पर लौटने की अपील भी की। इसके साथ ही कोर्ट ने डॉक्टर से दरिंदगी के मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी पर सवाल उठाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई।पीठ ने 14-15 अगस्त की रात अस्पताल में दंगाई भीड़ के घुस कर उपद्रव करने और अस्पताल की इमरजेंसी और घटना स्थल तक पहुंच जाने पर राज्य पुलिस की नाकामी पर भी ममता सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा आपकी पुलिस क्या कर रही थी।कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को उपद्रव की जांच के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है साथ ही डॉक्टर से दरिंदगी की जांच कर रही सीबीआई से भी जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने आरजी कर अस्पताल और हास्टल की सुरक्षा केंद्रीय बल सीआईएसएफ को दे दी है।शांति पूर्व प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता देते हुए कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा है कि वह शांति पूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शकारियों के खिलाफ ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगी। मामले में कोर्ट 22 अगस्त को फिर सुनवाई करेगा।ये आदेश मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जेबी पार्डीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने टास्क फोर्स को विभिन्न मुद्दों पर विचार कर तीन सप्ताह में अंतरिम और दो महीने में अंतिम रिपोर्ट देने को कहा है।पीठ ने कहा कि विभिन्न राज्यों जैसे महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, और तमिलनाडु में स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति हिंसा रोकने और संपत्ति नष्ट करने के लिए कानून हैं। इन कानूनों में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ किसी भी तरह की हिंसा की मनाही है। हालांकि इनमें समस्या के संस्थागत और व्यवस्थात्मक कारणों को रेखांकित नहीं किया गया है। संस्थागत सुरक्षा का स्तर सुधारे बगैर सजा में बढ़ोत्तरी समस्या को प्रभावी ढंग से हल करना नहीं होगा।शीर्ष अदालत ने आदेश में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा स्तर की खामियों की जमीनी हकीकत का उल्लेख करते हुए कहा है कि रात्रि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों स्वास्थ्यकर्मियों के आराम करने के लिए उचित स्थान नहीं होता। ड्यूटी रूम कम हैं।
इंटर्न और रेजीडेन्ट डॉक्टर 36 घंटे की शिफ्ट करते हैं उनके लिए साफ सफाई और आराम की समुचित व्यवस्था नहीं होती। मेडिकल केयर यूनिट में सुरक्षाकर्मियों की कमी रहती है।1- सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन2- डॉक्टर एन नागेश्वर रेड्ड़ी (एशियन इंस्टीट्यूट आफ गैस्ट्रोएनलाजी एंड एआइजी अस्पताल हैदराबाद के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर)3- डॉक्टर एम. श्रीनिवास एम्स दिल्ली के निदेशक4- डॉक्टर प्रतिमा मूर्ति (नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ और न्यूरोसाइंस (निमहांस) बंगलूरू की निदेशक5- डॉक्टर गोवर्धन दत्त पुरी एम्स जयपुर के कार्यकारी निदेशक6- डॉक्टर सौमित्र रावत मेम्बर बोर्ड आफ मैनेजमेंट सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली7- प्रोफेसर अनीता सक्सेना (पंडित बीडी शर्मा मेडिकल यूनीवर्सिटी रोहतक की पूर्व डीन और एम्स दिल्ली कार्डियोलाजी विभाग की प्रमुख8- डॉक्टर पल्लवी सापले (ग्रांट मेडिकल कालेज एंड जेजे ग्रुप आफ हास्पिटल मुंबई की डीन)9- डॉक्टर पद्मा श्रीवास्तव दिल्ली एम्स के न्यूरोलाजी विभाग की पूर्व प्रोफेसर हैं।
अभी पारस हेल्थ गुडग़ांव में न्यूरोलाजी की चेयरपर्सन हैं10- कैबिनेट सचिव11- केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव12- सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय13- नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष14- नेशनल बोर्ड आफ एग्जामिनेशन के अध्यक्षकोर्ट ने कहा कि इन लोगों के हास्टल तक आने जाने के लिए सुरक्षित ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं होती। और भी कई कारण आदेश में दिये गए और इन सब चीजों को देखते हुए कोर्ट ने नेशलन टास्क फोर्स का गठन किया है जो इन पहलुओं पर विचार करके अपने सुझाव देगी। इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह राज्यों के अस्पतालों में सुरक्षा उपायों पर राज्यों से सूचना एकत्र करेगी और एक महीने में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताएगी।

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