योगेश्वर के बाल रूप की हुई पूजा जन्माष्टमी पर

कोरबा। विधि-विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव जन्माष्टमी की विधिवत पूजा आज मध्य रात्रि को संपन्न होगी। मंदिरों में इसके लिए भव्य तैयारी की गई है। अनेक स्थानों पर भक्तों ने आज सुबह योगेश्वर के बाल रूप की पूजा-अर्चना की। दिन भर धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगीं। चौतरफा पर्व का उल्लास बना हुआ है।
द्वापर युग में श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ था। उन्होंने मथुरा स्थित कंस के कारागार में जन्म लिया। उनके जन्म के साथ कई प्रकार की दुर्लभ घटनाएं हुईं। लोकमाया के प्रभाव से उस दौरान वह सबकुछ हुआ जिसकी कल्पना लोगों के मस्तिष्क से बाहर की बात रही। अपने अवतरण के बाद के वर्षों में श्रीकृष्ण ने कई प्रकार की लीलाएं की और बहुत बड़े क्षेत्र में आसुरी शक्तियों का विनाश करने के साथ सत्जन शक्ति की रक्षा की, तब से उनके प्राकट्य उत्सव को धूमधाम से मनाने का सिलसिला चला आ रहा है। आज रोहिणी नक्षत्र की उपस्थिति और विशेष योग में उनका प्राकट्य पर्व सनातन समाज धूमधाम से मना रहा है। घरों और संस्थानों में योगेश्वर के बाल स्वरूप की सुबह पूजा अर्चना भक्ति भाव के साथ की गई। मंदिरों में भजन-कीर्तन का सिलसिला प्रारंभ हुआ जो शाम तक जारी रहा। कई स्थानों पर खिचड़ी भोग के आयोजन किए गए तो अनेक जगह आंखों पर पट्टी बांधकर मटकी फोडऩे तो कहीं आकाशीय दही हांडी की प्रतियोगिता रखी गई। हर तरफ बच्चों से लेकर युवाओं ने इसमें हिस्सा लिया। धूमधाम के साथ भक्ति गीतों की प्रस्तुति स्थानीय कलाकारों के द्वारा दी गई। मंदिरों में जन्माष्टमी का वृहद आयोजन मध्य रात्रि को संपन्न हुआ। इससे पहले श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर केंद्रित कार्यक्रम संपन्न होंगे। इस अवसर पर बच्चे राधा-कृष्ण के वेश में नजर आए जिन्होंने हर किसी का ध्यान खींचा।

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