
कोरबा। आर्थिक रूपेश सशक्त होने के लिए कई प्रकार की कोशिश जिले में की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलंबन के लिए विभिन्न आयाम पर काम किया जा रहा है। समय की मांग को देखते हुए फूलों की खेती की तरफ कई समूह ने हाथ बढ़ाया हैं। जिले के साथ अन्य क्षेत्रों में मार्केट उपलब्ध होने से ऐसे लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिला है।
जिले में काफी समय तक गेंदा फूल का उत्पादन करने को लेकर लोगों ने रुचि दिखाई। इसमें हाथ आजमाने से उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। 12 महीने इसकी मांग बने होने से उनका उत्साह दोगुना हुआ। अब वर्तमान में उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन और सरकार से सब्सिडी मिलने के कारण फूलों का उत्पादन करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अब गेंदा के अलावा डहेलिया कमल जरबेरियम के अलावा 10 से अधिक प्रजातियां पर प्रयोग शुरू किए गए हैं और यह काफी सफल रहे हैं। विकासखंड कोरबा और करतला क्षेत्र में फूल उत्पादन करने वालों ने बताया कि जबरदस्त मांगने उन्हें प्रोत्साहित किया है विभिन्न प्रकार के आयोजन के दौरान फूलों की मांग अक्सर बनी होती है। धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ सार्वजनिक कार्यक्रम और खास तौर पर अनुष्ठान में इनकी जरूरत होती है। समय के साथ ट्रेंड बदल रहे हैं और ऐसे में फूलों की मांग की बढ़ोतरी कई गुना ज्यादा हो रही है। इसके माध्यम से लोग यह भी दिखाने की कोशिश करते हैं कि वह इस प्रकार के कामकाज के बदले फ्लोरिंग के क्षेत्र में काम करने वालों को किस प्रकार से मजबूत कर सकते हैं। बताया गया कि जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां कई एकड़ क्षेत्रफल में फूलों की खेती की जा रही है। यहां बताना आवश्यक होगा कि कोरबा जिले में फूलों का व्यवसाय पश्चिम बंगाल के कोलकाता पर टिका हुआ है जहां से बड़ी संख्या में अलग-अलग श्रेणी के फूल यहां पहुंचते हैं। स्थानीय उत्पादक बताते हैं कि कोरबा जिले में ही फूलों की खेती को बढ़ावा मिलने से अब कारोबारी की मोनोपोली खत्म हो रही है।
























