‘रिक्लेम द नाइट’, कोलकाता में फिर रातभर विरोध-प्रदर्शन सडक़ों पर उतरे लाखों लोग, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी से भी समर्थन

कोलकाता, 0९ सितम्बर ।
आरजी कर कांड में न्याय की मांग पर कोलकाता समेत बंगाल के समस्त जिलों में रविवार रात फिर लाखों लोग सडक़ों पर उतरे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। इस अभूतपूर्व विरोध-प्रदर्शन में मृत महिला डॉक्टर के माता-पिता भी शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रातव्यापी अभियान से पहले रविवार दिनभर भी कोलकाता में विरोध-रैलियां निकाली गईं। जूनियर डॉक्टरों ने विभिन्न जगह कृत्रिम अदालत लगाकर आरजी कर कांड पर लोगों से उनका मत भी पूछा। इस नृशंस घटना के एक माह पूरे होने पर रिमझिम सिन्हा नामक आंदोलनकारी ने रविवार को तीसरी बार ‘रिक्लेम द नाइट’ अभियान का आह्वान किया है। इस कार्यसूची को ‘शासकेर घूम भांगाते नतून गानेर भोर’ (शासक को जगाने के लिए नए गीत वाली सुबह) नाम दिया गया है।
रिमझिम के अनुरोध पर बंगाल के संगीत जगत से जुड़े लोग इसमें बढ़-चढक़र हिस्सा ले रहे हैं और अपने-अपने इलाके में गीत-संगीत के जरिए प्रतिवाद जता रहे हैं। शाम होते ही लोग सडकों पर उमडने लगे थे। समाज के सभी वर्गों के लोग इसमें शामिल हुए हैं। इनमें शिक्षक, साहित्यकार, अधिवक्ता, कलाकार, गायक, रंगमंच कर्मी से लेकर कुम्हारटोली के मूर्तिकार व कोलकाता की विरासती हाथ रिक्शा चलाने वाले भी हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे भी इसका हिस्सा बने हैं। चिर-प्रतिद्वंद्वी फुटबाल क्लब ईस्ट बंगाल व मोहनबगान के समर्थक भी हाथ मिलाकर इसमें शामिल हुए हैं। कुछ जगहों पर मानव बंधन बनाकर विरोध जताया जा रहा है तो कुछ जगहों पर कैनवास पर घटना विरोधी चित्र उकेर कर। कहीं मोमबत्तियां जलाई गई हैं तो कहीं मशाल जलाकर विरोध किया जा रहा है। कुछ के हाथों में पोस्टर-बैनर हैं तो कुछ ने राष्ट्रीय ध्वज थाम रखा है। सभी ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगा रहे हैं।
कहीं ‘वी डिमांड जस्टिस’ के नारे लग रहे हैं।कोलकाता के धर्मतल्ला, टालीगंज, मौलाली, देशप्रिय पार्क, रासबिहारी एवेन्यू, हाजरा क्रासिंग, जादवपुर, बेहला, कालेज स्क्वायर समेत विभिन्न जगहों पर लोग जमा हुए हैं। श्यामबाजार से पीडि़ता के घर सोदपुर तक 14 किलोमीटर मानव बंधन बनाया गया हैं। मालूम हो कि इससे पहले दो बार यह अभियान हो चुका है। पहला 14 अगस्त व दूसरा चार सितंबर को हुआ था। 14 अगस्त के अभियान को लोगों का अभूतपूर्व समर्थन मिला था। दूसरी तरफ अमेरिका, इंग्लैंड, ब्राजील, जापान, जर्मनी, कनाडा समेत 16 देशों के 100 से अधिक शहरों में भी वहां रहने वाले बंगाली समुदाय के लोगों ने रविवार को घटना का प्रतिवाद जताया।

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