
नईदिल्ली, १८ सितम्बर ।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार की उस अधिसूचना पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें महिला डॉक्टरों की रात्रि ड्यूटी से परहेज और उनकी ड्यूटी 12 घंटे से ज्यादा न होने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा महिलाओं को रात्रि ड्यूटी करने से कैसे रोका जा सकता है। किसी भी महिला से यह नहीं कहा जा सकता कि तुम रात्रि ड्यूटी नहीं कर सकतीं। डॉक्टर, पायलेट, सशस्त्र बल सभी जगह रात्रि ड्यूटी होती है। महिला डॉक्टर हर परिस्थिति में काम करने को तैयार है और उन्हें हर परिस्थिति में काम करना चाहिए। महिलाएं रियायत नहीं बल्कि समान अवसर चाहती हैं। उन्हें रात्रि ड्यूटी से नहीं रोका जा सकता। उन्हें सुरक्षा प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है।शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि उसे अपनी अधिसूचना ठीक करनी चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने अस्पतालों में सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ठेके पर सुरक्षा कर्मी रखने पर भी सवाल उठाए। ये टिप्पणियां और निर्देश प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोलकाता में प्रशिक्षु डॉक्टर से दरिंदगी और हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान मंगलवार को दिये। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की पैरोकारी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा कि आप महिलाओं से नहीं कह सकते कि वे रात्रि ड्यूटी न करें। ये उनके कैरियर के लिए नुकसानदेह होगा। राज्य का कर्तव्य है कि वह उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए। महिलाएं कोई विशेष रियायत नहीं मांग रहीं वे बराबरी के अवसर चाहती हैं।
सिब्बल ने पीठ को भरोसा दिलाया कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा जो महिलाओं की समानता को प्रभावित करती होगी।















