पामगढ़। जनपद पंचायत पामगढ़ में कुछ सचिवों को मनमाने तरीके से आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। वहीं कुछ पंचायतों के सचिवों को जनपद पंचायत में संलग्न करके रखा गया है और उन्हें बिना काम के वेतन दिया जा रहा है।
इससे ग्राम पंचायतों के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। मगर जिम्मेदार अधिकारियों को इससे कोई सरोकार नहीं है।जनपद पंचायत पामगढ़ के सीईओ अपने चहते पंचायत सचिवों को उपकृत करने में लगे हुए हैं। पंचायत सचिवों को दो-दो पंचायत का प्रभार दे दिया जा रहा है या फिर जनपद पंचायत में संलग्न कर दिया जा रहा है। इसके चलते ग्राम पंचायतों का कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
पंचायत सचिव दिनेश कुमार यादव को ग्राम पंचायत कोनार के साथ साथ चोरभ_ी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी तरह सकून कुमार साहू को ग्राम पंचायत बुंदेला के साथ ग्राम पंचायत ससहा, सुमित सिंह को ग्राम पंचायत मुलमुला के साथ ग्राम पंचायत डिघोरा, अरविंद शर्मा को ग्राम पंचायत सिल्ली के साथ पचरी, रामविलास साहू को ग्राम पंचायत पड़रिया के साथ ग्राम पंचायत पकरिया का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
इनमें अधिकतर ग्राम पंचायतों की दूरी 15-30 किलोमीटर है जबकि आसपास के ग्राम पंचायत के सचिव को अतिरिक्त प्रभार दिया जाना चाहिए था। बुंदेला से ग्राम ससहा की दूरी 24 किलोमीटर से अधिक है वही चोरभठ्ठी से कोनार की दूरी 18 किलोमीटर से अधिक है, मुलमुला से डीघोरा की दूरी 15 किलोमीटर है
इसके बाद भी अपने चहेते सचिवों को प्रभार बिना नियमों को ताक में रखे बैगैर अतिरिक्त प्रभार दिया गया हैं। ये पूरा मामला पामगढ़ जनपद मेंचर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं इससे स्पष्ट है कि बिना जनपद पंचायत के प्रस्ताव के जिला कार्यालय से प्रभार दे दिया गया है।
जनपद पंचायत पामगढ़ में लंबे समय से छह ऐसे पंचायत सचिव हैं जिन्हें बिना किसी काम के संलग्न करके रखा गया है। पंचायत सचिवों की नियुक्ति ग्राम पंचायतों में कार्य करने के लिए होती है ताकि ये शासन के दिशा निर्देशों के अधीन ग्रामीण जनता तक केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का संचालन करते हुए ग्रामीणों को अधिक से अधिक लाभ दिला सकें।
जनपद पंचायत में खोलबहरा दिनकर, सोनेलाल कुर्रे, किसुन लाल लहरे, लकेश्वर यादव, राजकुमार कैवर्त और ऐश्वर्य बघेल सहित छह सचिव जिन्हें जनपद पंचायत में संलग्न किया गया है। कई सचिवों के प्रभार जनपद से भेजने के बाद भी उसे जिला पंचायत द्वारा बदलकर अपने चहेते को आदेश दे दिया जाता है। पंचायतों के कार्यकाल का यह अंतिम वर्ष होने के कारण कार्य समय सीमा में पूर्ण हो सके इसके लिए बकायदा डीएमएफ योजना के तहत सभी ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य स्वीकृत किये जा रहे हैं लेकिन अतिरिक्त प्रभार होने के कारण सचिव उक्त कार्यो को समय सीमा में पूर्ण कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा पा रहे है जिससे निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।