
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी गश्त के दौरान बलिदानी सैनिक की पत्नी को लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन देने के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के आदेश के विरुद्ध अपील करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस अगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने कहा कि बलिदानी की पत्नी को अदालत में नहीं घसीटा जाना चाहिए था। अपीलकर्ता के निर्णय लेने वाले प्राधिकारी को बलिदानी सैनिक की पत्नी के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए थी। साथ ही कहा कि जुर्माने की राशि का भुगतान दो महीने के भीतर प्रतिवादी को किया जाएगा।
एएफटी ने बलिदानी की पत्नी को जनवरी, 2013 से बकाये समेत लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन देने का निर्देश दिया था। यह मामला नायक इंदरजीत सिंह से जुड़ा है जिन्हें जनवरी, 2013 में बेहद प्रतिकूल मौसम में गश्त करने के दौरान हृदयाघात हुआ था।
शुरुआत में उनकी मृत्यु को युद्ध के दौरान मृत्यु की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन बाद इसे सैन्य सेवा के दौरान मृत्यु की श्रेणी में परिवर्तित कर दिया गया था। शहीद की पत्नी को स्पेशल फैमिली पेंशन (अंतिम वेतन का 60 प्रतिशत) समेत सभी लाभ प्रदान किए गए थे, लेकिन उन्हें लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन (अंतिम वेतन के बराबर) देने से इन्कार कर दिया या था। जिस पर इंदरजीत की पत्नी ने एएफटी में याचिका दायर की थी।






























