
नई दिल्ली। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने विदेश भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) पर पांच प्रतिशत कर लगाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर उन प्रवासी भारतीयों पर पड़ेगा, जो वहां से अपने घर पैसा भेजते हैं।
प्रस्तावित शुल्क अमेरिकी नागरिकों पर लागू नहीं होगा
रेमिटेंस से भारत को मिलने वाला धन
आरबीआई के मार्च बुलेटिन के अनुसार, रेमिटेंस से भारत को मिलने वाला धन 2010-11 के 55.6 अरब डॉलर से दोगुना होकर 2023-24 में 118.7 अरब डॉलर हो गया है। बुलेटिन के अनुसार, 2023-24 में भारत को मिले कुल रेमिटेंस में अमेरिकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 27.7 प्रतिशत रही। 2020-21 में यह 23.4 प्रतिशत था। 27.7 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 32.9 अरब डॉलर के रेमिटेंस के बराबर है। 32.9 अरब डालर पर अगर पांच प्रतिशत कर लगता है तो यह लागत 1.64 अरब डॉलर होगी।
रेमिटेंस की लागत में दो हिस्से शामिल होते हैं
आरबीआई के लेख में कहा गया है कि रेमिटेंस की लागत में दो हिस्से शामिल होते हैं। लेनदेन के किसी भी चरण में लिया जाने वाला शुल्क और स्थानीय मुद्रा से प्राप्तकर्ता देश की मुद्रा में विनिमय दर।



























