साक्षरता प्रेरकों ने श्रम मंत्री को सौंपा ज्ञापन

2018 से साक्षरता प्रेरक झेल रहे है बेरोजगारी की मार
कोरबी चोटिया। छत्तीसगढ़ में 2007 से साक्षर भारत कार्यक्रम के तहत लगभग 18000 प्रेरकों की नियुक्ति प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक महिला व एक पुरुष किया गया था । जिसे 2000 मासिक ?मानदेय प्रदान किया जा रहा था जिसका उद्देश्य प्रौढ़ शिक्षा के माध्यम से 18 वर्ष से अधिक असाक्षरों को शिक्षा प्रदान करना था । प्रेरक प्रौढ़ शिक्षा के साथ-साथ पंचायत के विभिन्न कार्यों में सतत अपना सहयोग करते थे ।स्कूली शिक्षा का कार्य , सर्वे ,निरीक्षण , जॉब कार्ड ,राशन कार्ड ,शौचालय निर्माण में अपनी अहम भूमिका प्रेरकों के द्वारा निभाया गया । किंतु साक्षरता प्रेरको को 31 मार्च 2018 से इस कार्यक्रम से पृथक कर दिया गया ।जबकि आज भी कार्यक्रम संचालित है ।प्रदेश अध्यक्ष संदीप द्विवेदी एवं उपाध्यक्ष संतोष यादव के दिशानिर्देश में कोरबा जिला अध्यक्ष रविंद्र कुमार बाजपेयी एवं संगठन मंत्री रामकुमार चौहान के द्वारा 3.8. 2025 को उद्योग वाणिज्य एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन को रोजगार प्रदान करने हेतु मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन सौपा गया । प्रेरकों ने ज्ञापन के माध्यम से मंत्री को अवगत कराया कि विधानसभा चुनाव में जारी मोदी के गारंटी पत्र के तहत 1.5 लाख लोगों को रोजगार देने के लिए सरकार तुहर द्वार योजना का उल्लेख है ।वहां पर प्रेरकों को प्राथमिकता प्रदान करते हए रखने की मांग की गई है ।इस अवसर पर कोरबा जिले से श्रीमती पूर्णिमा साहू ,दिनेश कुमार ,ईश्वर सिंह सहित प्रेरक गण मौजूद रहे ।*प्रदेश अध्यक्ष संदीप द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ के समस्त प्रेरक बहनों को इस रक्षाबंधन में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री पंचायत मंत्री को राखी के साथ-साथ रोजगार हेतु ज्ञापन प्रेषित करने का अपील किया गया है।

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