
कोरिया। क्षेत्रीय चिकित्सालय, चर्चा जो एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र का प्रमुख अस्पताल माना जाता है, इस चिकित्सालय में बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत पांडव पारा ,झिलमिली, कटकोना कॉलरी, चरचा माइन आर ओ मे काम करने वाले हजारों कर्मचारी व उनके परिजन इलाज कराने आते हैं इस चिकित्सालय में प्रतिवर्ष लाखों-करोड़ों रुपये की लिपाई-पुताई और मरम्मत के नाम पर खर्च कर दिए जाते हैं। कागज़ों में इस अस्पताल को हर सुविधा से युक्त बताया जाता है, लेकिन हकीकत बेहद दर्दनाक है।
अस्पताल की मरचुरी यानी मृतकों को रखने का स्थान, अपनी बदहाल स्थिति की दास्तां खुद कह रहा है। मरचुरी के सामने पूरे टाइल्स टूटे और उखड़े पड़े हैं, ऊपर लगे फाइबर शीट का सेड जो कई जगह से टूट गया है उसमें से लगातार पानी रिसता रहता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है—मृतक के परिजन अपने प्रियजनों को यहाँ रखने के बाद खुद भीगते हुए खड़े रहने को मजबूर होते हैं। इस स्थान पर मृतक के परिजनों के बैठने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। अस्पताल की मरचूरी के सामने परिजन आंसू संग बारिश में भीगने को मजबूर है छत से रिश्ता पानी और टूटी जमीन यह सब मिलकर लापरवाही की कहानी खुद बयां करते हैं विडंबना यह है कि चर्चा की खदानें हर साल करोड़ों का लाभ देती हैं, मगर इस लाभ का एक छोटा सा हिस्सा भी मरचुरी जैसी संवेदनशील जगह की मरम्मत पर खर्च नहीं हो पा रहा है। *मानव संवेदनाओं से जुड़ा यह दर्दनाक दृश्य विभागीय लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है। करोड़ों की आमदनी होने के बावजूद मर्करी में इंसानियत रोती नजर आ रही है बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक बी.एन. झा सदैव सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। अब देखना यह है कि वे इस गम्भीर और संवेदनशील समस्या का संज्ञान लेकर कब तक मृतक परिजनों की इस पीड़ा का समाधान करवाते हैं।