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कोरबा: नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के कोरबा संयंत्र ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में अपने सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मद में 6.24 करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि, इस राशि का उपयोग बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, पानी, बिजली या ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर नहीं किया गया, जिससे स्थानीय समुदाय की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी का आरोप लगाया जा रहा है।

सीएसआर खर्च का ब्योरा 

प्राप्त जानकारी के अनुसार एनटीपीसी कोरबा संयंत्र ने सीएसआर मद में निम्नलिखित तरीके से खर्च किया:

>- *पर्यावरण सुधार*: ₹4.31 करोड़

>- *स्वास्थ्य सुधार*: ₹88 लाख

>- *शिक्षा*: ₹53 लाख

>- *ग्रामीण विकास*: ₹23 लाख

>- *खेल*: ₹17 लाख

>- *कला एवं संस्कृति*: ₹12 लाख

बुनियादी सुविधाओं पर निवेश की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, सीएसआर के तहत एक भी कार्य ऐसा नहीं है जो कोरबा के स्थानीय समुदाय की बुनियादी जरूरतों जैसे सड़क निर्माण, स्वच्छ पेयजल, बिजली कनेक्शन, जल निकासी या स्थायी ग्रामीण विकास से जुड़ा हो।

खर्च का ब्योरा भी अस्पष्ट

पर्यावरण सुधार मद में खर्च किए गए ₹4.31 करोड़ की राशि का ब्योरा कोरबा-एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि ये कार्य किस स्थान पर, किन साधनों और किन उद्देश्यों के लिए किए गए।

बड़ी कंपनी परंतु सीमित सामाजिक भागीदारी
कोरबा-एनटीपीसी की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 2600 मेगावाट है और 800 मेगावाट की नई इकाई भी प्रस्तावित है। ऐसे में यह गंभीर विषय है कि इतनी बड़ी औद्योगिक इकाई अपने परिचालन क्षेत्र में सीएसआर के माध्यम से कोई ठोस योगदान नहीं दे रही है।

प्रशासन की भूमिका 

जिला प्रशासन की भूमिका भी इस स्थिति में संदिग्ध नजर आती है, क्योंकि प्रशासन ने कोरबा-एनटीपीसी को किसी भी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े प्रस्ताव नहीं सौंपे हैं।

स्थानीय नागरिकों की नाराजगी

स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एनटीपीसी कोरबा जिले की धरती का सीना फाड़, प्रदूषण फैला, लोगों के जीवन को संकट में डाल, हवा में राख रूपी जहर घोल अरबों की बिजली पैदा कर रही है, लेकिन यहां के स्थानीय निवासी और ग्रामीणों हेतु सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा रही हैं।

सीएसआर मद का उद्देश्य

सीएसआर मद का उद्देश्य सिर्फ “राशि खर्च करना” नहीं, बल्कि स्थायी और ठोस सामाजिक परिवर्तन लाना होता है। कोरबा-एनटीपीसी का मौजूदा रुख इस उद्देश्य से मेल नहीं खाता। यदि प्रशासन और कंपनी मिलकर पारदर्शी और जरूरत-आधारित नीति अपनाएं, तो कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में भी वास्तविक विकास की रेखाएं खिंच सकती हैं।