कोरबा। भाद्रपद अमावस्या को लोक परंपरा और विश्वास के साथ समाज जीवन से जुड़े लोगों ने पोला पर्व मनाया। इस अवसर पर कृषि संसाधनों के साथ नन्दी बैलों की पूजा की गई। उनके योगदान के उपकार को रेखांकित करना इसका एक उद्देश्य था।
प्राचीन कालखंड से भाद्रपद अमावस्या को पोला पर्व मनाने की परंपरा रही है। कोरबा जिले के शहरी और ग्रामीण अंचल में इस त्यौहार पर कृषक समुदाय ने अपने कृषि संबंधी उपकरणों के साथ-साथ नंदी बैलों की पूजा की और उन्हें पकवान अर्पित किए। कृषक समुदाय ने अपने घरों में विधिपूर्वक नंदी अथवा उनके प्रतिको को रख पूरी आस्था के साथ पूजा अर्चना की। इसके साथिया दर्शाने का प्रयास किया गया कि जिनके माध्यम से कृषि संबंधी कार्य संपन्न होते हैं और प्रगति सुनिश्चित होती है उनकी भूमिका को मान्यता देना आवश्यक है। सुबह से दोपहर तक विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार की परंपरा का निर्वहन हिंदू समाज के द्वारा किया गया। बताया गया कि भले ही आधुनिकता का समावेश वातावरण में हो गया है लेकिन इन सब के बावजूद लोकाचार अपनी पुरानी जड़ों से मजबूती से जुड़ा हुआ है। कृषक वर्ग ने बताया कि भारत की प्रगति में कृषि का अपना खास योगदान होता है और जो फैक्टर इसके लिए बेहद खास है उनका ध्यान रखना हमारा नैतिक कर्तव्य बनता ही है।