कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर में स्थित लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैला शासकीय पोल्ट्री फार्म अब बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। कभी यह फार्म पूरे सरगुजा एवं बिलासपुर संभाग के लिए मुर्गी पालन एवं चुजे वितरण की रीढ़ हुआ करता था, लेकिन वर्ल्ड फ्लू (बर्ड फ्लू) की महामारी के चलते इसे शासन द्वारा अस्थायी रूप से सील कर दिया गया था। केंद्र सरकार ने महामारी समाप्त होने के बाद पुन: इसे शुरू करने के निर्देश जारी किए, किंतु स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विरोध के कारण यह फार्म आज भी बंद पड़ा हुआ है। यदि समय रहते इसे चालू नहीं किया गया तो इसका स्थायी रूप से बंद होना तय है। इस शासकीय पोल्ट्री फार्म के जरिए न केवल कोरिया जिले बल्कि सरगुजा और बिलासपुर संभाग में भी विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत गरीब एवं ग्रामीण परिवारों को चुजे वितरित किए जाते थे। पशुपालन विभाग द्वारा यह फार्म आत्मनिर्भरता और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कडक़नाथ, देशी मुर्गा और लेयर जैसी नस्लों के चुजे उपलब्ध कराए जाते थे, जिससे पशुपालकों को आय का साधन मिलता था। आज फार्म बंद रहने के कारण इन योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। गरीब परिवारों को चुजे समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस फार्म की खासियत यह थी कि यहां कडक़नाथ प्रजाति के मुर्गे भी पाले जाते थे। कडक़नाथ को ब्लैक गोल्ड कहा जाता है, क्योंकि इसका मांस न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर भी माना जाता है। यह प्रजाति भारत में मुख्य रूप से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पाई जाती है। बैकुंठपुर का पोल्ट्री फार्म इस प्रजाति के संरक्षण और प्रसार में बड़ी भूमिका निभा रहा था। अब फार्म बंद होने से स्थानीय लोगों को कडक़नाथ प्रजाति मिलना लगभग असंभव हो जाएगा। निजी स्तर पर यह प्रजाति बहुत महंगी है और सामान्य ग्रामीण इसे खरीदने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में फार्म का बंद होना सीधे तौर पर ग्रामीणों से उनके पोषण और स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण साधन छीन लेने जैसा है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने बर्ड फ्लू की महामारी समाप्त होने के बाद फार्म को पुन: चालू करने का आदेश दिया था। लेकिन बैकुंठपुर क्षेत्र के कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि पोल्ट्री फार्म को चालू करने से पुन: बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ सकता है। इस विरोध के कारण जिला प्रशासन ने भी ठोस कदम नहीं उठाए और फार्म अब तक बंद पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विरोध तर्कसंगत नहीं है। आज वैज्ञानिक तकनीक और सुरक्षा उपायों के जरिए पोल्ट्री फार्म को सुरक्षित रूप से चलाया जा सकता है। यदि सही प्रबंधन किया जाए तो बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों की रोकथाम संभव है। यह पोल्ट्री फार्म बैकुंठपुर के साथ-साथ पूरे जिले में रोजगार का बड़ा साधन था। यहां सीधे तौर पर कई लोगों को नौकरी मिलती थी, वहीं अप्रत्यक्ष रूप से चारा विक्रेता, दवा आपूर्तिकर्ता और परिवहन से जुड़े लोग भी लाभान्वित होते थे। फार्म के बंद रहने से न केवल पशुपालकों को नुकसान हो रहा है बल्कि बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ रही है। ग्रामीण स्तर पर लोग आत्मनिर्भर बनने की बजाय फिर से आर्थिक रूप से पिछडऩे लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आम नागरिकों और पशुपालकों का मानना है कि जिला प्रशासन कोरिया को पहल करनी चाहिए। साथ ही बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं जनप्रतिनिधियों को भी राजनीति से ऊपर उठकर इस फार्म को पुन: चालू कराने की दिशा में कार्य करना चाहिए। पशुपालन विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यदि इस फार्म को जल्द ही चालू नहीं किया गया तो इसकी पूरी संरचना नष्ट हो जाएगी और पुन: इसे खड़ा करना असंभव हो जाएगा।
भविष्य की चुनौतियाँ-अगर पोल्ट्री फार्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है तो जिले के लोगों के सामने कई चुनौतियाँ खड़ी होंगी—कडक़नाथ जैसी दुर्लभ प्रजाति तक ग्रामीणों की पहुंच खत्म हो जाएगी। सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब परिवारों तक नहीं पहुंच पाएगा। रोजगार के अवसर घट जाएंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।निजी पोल्ट्री कारोबारियों की पकड़ बढ़ेगी, जिससे आम उपभोक्ता को महंगी कीमत पर ही चुजे मिलेंगे।
कोरिया जिले का यह पोल्ट्री फार्म कभी ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक हुआ करता था। आज राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह बंद होने की कगार पर है। यदि समय रहते इसे पुन: चालू नहीं किया गया तो यह केवल जिले के लिए ही नहीं बल्कि पूरे सरगुजा संभाग के लिए बड़ी क्षति होगी। जनता की अपेक्षा है कि शासन-प्रशासन जल्द ही इस मुद्दे को गंभीरता से ले और फार्म को फिर से शुरू कराकर ग्रामीणों को राहत दे।