कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिले में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब ताजा मामला जनपद पंचायत बैकुंठपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सलका से जुड़ा है। यहां पूर्व सरपंच के द्वारा शासन की योजनाओं के नाम पर भारी-भरकम राशि आहरित कर ली गई। इस मामले में नवनिर्वाचित सरपंच के द्वारा की गई शिकायत को लेकर कलेक्टर कार्यालय के आदिवासी विकास विभाग के द्वारा जारी पत्र के द्वारा कार्यवाही करने को लेकर किया गया है।  इस पूरे मामले मे कोरिया कलेक्टर कार्यालय के आदिवासी विकास विभाग द्वारा  12 अगस्त 2025 को पत्र क्रमांक 1900 जारी कर तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए।पत्र में साफ उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत सलका के पूर्व सरपंच ने यात्री प्रतीक्षालय निर्माण हेतु स्वीकृत राशि रू.4,46,000 में से रू.3,75,000 का आहरण कर लिया, जबकि स्थल पर निर्माण कार्य आज तक प्रारंभ ही नहीं हुआ है। यही नहीं, सीसी सडक़ निर्माण मद में स्वीकृत रू.2,80,000 में से रू.1,11,000 भी निकाल लिया गया है। इस तरह कुल मिलाकर लाखों रुपये शासन से निकाल लिए गए लेकिन जनता को बुनियादी सुविधा देने के नाम पर सिर्फ कागजों में ही काम पूरे दिखा दिए गए। ग्राम सलका के लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यात्री प्रतीक्षालय और पक्की सडक़ का इंतजार कर रहे हैं। यात्री प्रतीक्षालय के अभाव में ग्रामीणों को बारिश और धूप में घंटों परेशान होना पड़ता है। वहीं, अधूरी सीसी सडक़ के कारण आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि शासन से पैसे आने के बावजूद सरपंच और पंचायत सचिव की मिलीभगत से केवल राशि निकाली गई और कार्यस्थल पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई। यह स्थिति सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ मजाक के समान है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कलेक्टर कार्यालय से जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि दो दिवस के भीतर जिम्मेदार अधिकारियों और सरपंच पर कार्यवाही की जाए। लेकिन आज दिनांक तक कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह लापरवाही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करती है। जानकारों का कहना है कि विभागीय आदेश के बावजूद अगर कार्रवाई नहीं होती है तो यह सीधे-सीधे भ्रष्ट अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के गठजोड़ को दर्शाता है। इससे यह भी जाहिर होता है कि शासन की योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के बजाय कुछ लोग केवल निजी स्वार्थ के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस घोटाले की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लोग आपस में पूछ रहे हैं कि आखिर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए लेकिन जमीन पर कार्य क्यों नहीं हुआ? युवाओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं जनता के भरोसे को तोड़ती हैं। सरकार ग्रामीण विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन जब निचले स्तर पर ही भ्रष्टाचार हावी हो जाता है तो योजनाओं का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। कलेक्टर कार्यालय से पत्र जारी होने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिरकार देरी क्यों हो रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई दबाव है, या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह वर्षों तक लंबित रह जाएगा? जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों को तत्काल सजा दी जाए। साथ ही, निकाली गई राशि को पुन: वसूलकर वास्तविक निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से ही ऐसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। यदि ग्राम स्तर पर समय-समय पर सोशल ऑडिट और जनसुनवाई की जाती, तो संभवत: इस तरह का गबन सामने नहीं आता। गांव के लोगों ने मांग की है कि न केवल सलका बल्कि आसपास की सभी ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की जांच की जाए, ताकि अन्य स्थानों पर भी यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो उसका खुलासा हो सके। सलका के ग्रामीणों का कहना है कि वे अब चुप नहीं बैठेंगे। यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं बल्कि जनता के अधिकारों और विश्वास से खिलवाड़ का है। ग्राम पंचायत सलका में यात्री प्रतीक्षालय और सीसी सडक़ निर्माण के नाम पर लाखों रुपये आहरित कर लिए गए, लेकिन जमीन पर कार्य आज तक अधूरा है। कलेक्टर कार्यालय से आदेश के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। यह घटना न केवल शासन की योजनाओं पर सवाल खड़ा करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि यदि निचले स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई गई तो ग्रामीण विकास का सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन कब तक इस मामले में कार्रवाई करता है और दोषियों को कब तक सजा दिलाता है।