
जांजगीर। नगर सेना और एसडीआरएफ की टीम पामगढ़ थाना क्षेत्र के तनौद गांव से रहस्यमयी ढंग से लापता हुए युवक कौशल श्रीवास की लाश की तलाश चार दिन से लीलागर नदी में कर रही थी, लेकिन चौथे दिन जांजगीर साइबर सेल की सतर्कता और तकनीकी जांच के चलते मामले का जो सच सामने आया, उसने पुलिस और परिजनों को भी चौंका दिया। गुम इंसान कौशल श्रीवास न केवल जीवित मिला, बल्कि वह बिलासपुर रेलवे स्टेशन और तोरवा क्षेत्र में घूमता पाया गया। पुलिस ने उसे सकुशल बरामद कर लिया है। पूछताछ में युवक ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था।
दरअसल, कौशल श्रीवास का 40 लाख का बीमा था और उसके पिता लाखों रुपये के कर्ज में डूबे थे। इसी से परेशान होकर कौशल ने सुनियोजित तरीके से खुद को मृत दिखाने की साजिश रची। 19 अगस्त को कौशल अपने घर से यह कहकर निकला कि वह गांव घूमकर आ रहा है। वह अपनी मां का मोबाइल भी साथ ले गया। कुछ देर बाद परिजनों को सूचना मिली कि उसकी मोटरसाइकिल और मोबाइल शिवनाथ नदी के पैसर पुल के पास लावारिस पड़े हैं। वहीं उसका एक जूता भी बरामद हुआ। ऐसे में परिजनों ने नदी में बह जाने की आशंका जताते हुए थाना पामगढ़ में गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कराई। घटना स्थल की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम को लीलागर नदी में तलाश के लिए लगाया गया।चार दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलता रहा, लेकिन कौशल का कहीं पता नहीं चला।भाई को मैसेज, फ्रेंड को कॉल जांजगीर साइबर सेल ने जब जांच शुरू की, तो पता चला कि कौशल ने 20 अगस्त को अपने दोस्त को मैसेज भेज खुद को सुरक्षित बताया। 23 को उसके भाई को एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें सामने वाले ने खुद को कौशल बताया।
यह कॉल बिलासपुर रेलवे स्टेशन से एक राहगीर के फोन से किया था। बिलासपुर आरपीएफ व पुलिस को सतर्क कर टीम ने फोटो भेजा। कुछ ही देर में तोरवा क्षेत्र में मुखबिर से सूचना मिली कि कौशल जैसा युवक घूम रहा है। टीम ने मौके पर पहुंच उसे पकड़ लिया।