
निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ जनता परेशान
कोरबा। विकासखंड कोरबा की रजगामार ग्राम पंचायत का भायोग्दय कब होगा, यह स्थानी जनप्रतिनिधियों के साथ यहां की जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को संपन्न हुए 6 महीने का समय हो चुका है लेकिन अब तक इस पंचायत में नए कामकाज का अतापता नहीं है।
खबर के अनुसार काफी समय से अलग-अलग मामलों को लेकर विवाद की जो स्थिति बनी हुई है उसमें कमी आने के बजाय अब बढ़ोतरी होती जा रही है। हर स्तर पर खींचतान ने यहां की दुर्दशा कर रखी है। जानकारी मिली है कि पिछले कार्यकाल में ग्राम पंचायत के द्वारा अलग-अलग क्षेत्र में कराए गए कार्यों के एक करोड़ 56 लख रुपए का भुगतान अब तक अटका हुआ है। सत्यापन के बाद भी इस दिशा में अगली कार्यवाही नहीं हो सकी है। ऐसे में काम करने वाली एजेंसी तो परेशान है ही उन लोगों के सामने भी चुनौती बनी हुई है जिन्होंने ग्राम पंचायत को विभिन्न प्रकार के सामान उपलब्ध कराए। भुगतान की व्यवस्था न होने से बाजार में उनकी क्रेडिबिलिटी पर बुरा असर पड़ रहा है।
जानकारी मिली है कि पुराने विवाद ,नई शिकायत और अब प्रेस्टीज इश्यू के चक्कर में रजगामार पंचायत में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि ना तो पिछले भुगतान को लेकर गंभीरता दिखाई जा रही है और ना ही जन आवश्यकता से संबंधित नए कार्यों के प्रस्तावों को पारित किया जा सक रहा है। इस चक्कर में किसी भी प्रकार के कार्यों को गति दिया जाना सबसे जटिल हो गया है। सूचनाओं में बताया गया कि कुछ समय पहले पिछले भुगतान को समायोजित करने की बात की गई लेकिन बाद में इससे भी कन्नी काट ली गई।
सबसे बड़ी परेशानी इस पंचायत में काम करने वाले लोगों के सामने है, जो इस बात को लेकर चिंतित है कि उन्होंने धरातल पर जिन कार्यों को कराया आखिर उनका भुगतान आखिर हो भी पाएगा या नहीं। दूसरी और हाल में हुए चुनाव में जनता ने जिन प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी वे भी अपनी भूमिका का निर्वहन कर पाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए अब सवाल उठने लगा है कि क्या जनता ने चुनाव में लोकतांत्रिक अधिकार का निर्वहन कर बड़ी गलती कर दी जिसकी सजा पंचायत को दी जा रही है?