
पटना। मुंगेर जिला में इटहरी पंचायत है। डॉ. सुनील (ग्रामीण चिकित्सक) वहां पांच दर्जन से अधिक गरीब ग्रामीणों के साथ इस माथापच्ची में लगे हुए हैं कि मतदाता-सूची में हुई गड़बड़ी दूर कैसे होगी। व्यवस्था तो काहिल है। प्रारूप में उन लोगों के भी नाम नहीं, जो 2000 में विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान कर चुके हैं। कल्यापुर टोला, महेशपुर, नाथ टोला, पेरू मंडल टोला, विजय नगर जैसी दर्जनों बस्तियों की यही शिकायत है। उधर अररिया में काली मंदिर चौक पर फास्ट फूड की दुकान चलाने वाले पवन शर्मा बता रहे कि सीमांचल में तो वही हो-हल्ला कर रहे, जो गलत तरीके से मतदाता-सूची में अपने नाम दर्ज करा लिए थे। ऐसे में मतदाता-सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण तो होना ही चाहिए। एसआइआर पर पूरे बिहार में यही मिश्रित स्थिति और मनोभाव है। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा जिस समय बेतिया से गुजर रही थी, ऐन उसी वक्त सागर पोखरा चौक पर बीएलओ राजेश कुमार मतदाता-सूची में पांच-छह लोगों के नाम संशोधित करने की प्रक्रिया में तल्लीन थे। उनसे थोड़ी दूर चाय की दुकान पर अशोक सिंह चारों दिशाओं में हाथ उठा-उठाकर बता रहे थे कि कहां कितने नाम फर्जी हैं और कहां किसके प्रभाव-क्षेत्र में फर्जी मतदाता। राहुल गांधी के आरोपों को वे बचकानी मानते हैं और उसकी पुष्टि में उनके उन दो उदाहरणों को गिनाते हैं, जिन्हें साक्ष्य के साथ निर्वाचन आयोग गलत सिद्ध कर चुका है। वे उदाहरण नवादा और सासाराम से संबंधित हैं।













