
हापुड़, १२ सितम्बर।
डीएफओ (जिला वन अधिकारी) का स्टेनो आरा मशीन संचालकों से वसूली कर रहा था। नए डीएफओ के आने के बाद टीपी (ट्रांजिट पास) के नाम पर वसूली लिपिक ने दोगुनी कर दी थी। विरोध करने पर लाइसेंस केंसिल करने की भी धमकी देता था। इससे परेशान आरा मशीन संचालकों ने शहर विधायक से शिकायत की। विधायक ने डीएफओ व वन मंत्री से नाराजगी प्रकट की। प्रारंभिक जांच में आरोपित स्टेनो पर वसूली के आरोप सही पाए गए हैं। जिसके चलते वन संरक्षण ने स्टेनो का स्थानांतरण बुलंदशहर कर दिया है। वन विभाग में वसूली का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आरा मशीन संचालकों से वसूली के साथ ही पेड़ काटने वाले ठेकेदारों से भी रुपए लिए जाते हैं। विभाग के कर्मचारी मिलीभगत कर प्रतिबंधित श्रेणी के हरे पेड़ों को भी कटवा देते हैं। पिछले दिनों गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हरे पेड़ों के काटे जाने का मामला जोरशोर से उठाया गया था।आरा मशीन संचालकों ने बृहस्पतिवार को शहर विधायक विजयपाल आढ़ती से मुलाकात की।
नवीन कुमार, दीपक सिंह, राजीव कुमार, गोपाल सिंह, सचिन कुमार और मुकुल सिंह ने विधायक को बताया कि जिले से लकड़ी का बड़े स्तर पर निर्यात होता है। इसके लिए वन विभाग से टीपी (ट्रांजिट पास) की जरूरत होती है।पिछले दिनों तक टीपी के निर्धारित शुल्क के अलावा वन विभाग के अधिकारी दो से ढ़ाई हजार रुपया प्रति 30 टन पर लेते थे। उस समय नोएडा के डीएफओ पर हापुड़ का अतिरिक्त प्रभार था। पिछले दिनों हापुड़ में अर्शी मलिक को डीएफओ तैनात कर दिया गया। आरा मशीन संचालकों ने बताया कि तब से नए डीएफओ के नाम पर टीपी की वसूली बढ़ा दी गई है। अब टीपी की फीस के अलावा परमिशन देने के 400 रुपये टन लिए जा रहे हैं। ऐसे में 30 टन के जिस वाहन पर पहले 25 सौ रुपये लिए जाते थे, अब उसके 12 हजार रुपये लिए जा रहे हैं।






















