
कोरिया चरचा कॉलरी। पर्यावरण संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर चर्चा क्षेत्रीय चिकित्सालय और क्षेत्र प्रबंधक कार्यालय की छत पर लगाए गए सोलर पैनल अब ऊर्जा नहीं बल्कि उजाड़ का प्रतीक बन गए हैं। गुजरात की एक कंपनी ने करीब एक वर्ष पहले यह कार्य पूरा किया था, लेकिन पैनलों से आज तक एक यूनिट भी बिजली नहीं निकली। जंगली बंदरों की उछल कूद और रखरखाव के अभाव में प्लेटें खराब हो रही हैं क्षेत्रीय चिकित्सालय की छत पर लगे तार व अन्य सामान तो चोरी तक हो गए। सूत्र बताते हैं कि इस कार्य का भुगतान भी लाखों में कर दिया गया है, बावजूद इसके पूरा प्रोजेक्ट सफेद हाथी साबित हो रहा है।
कोयला उत्पादन में दिन-रात पसीना बहाने वाले श्रमिकों की कमाई से जुटाए गए पैसों का इस तरह दुरुपयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि यही सौर ऊर्जा संयंत्र समय पर चालू कर दिए जाते, तो आज तक चर्चा क्षेत्र को बिजली खर्च में भारी राहत मिलती।नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन देने के लिए रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की यह योजना कागजों में सुनहरी है, लेकिन ज़मीन पर यह केवल भ्रष्टाचार की धूप में पिघल रही है। कोल इंडिया लिमिटेड की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक सहायक कंपनी एसईसीएल द्वारा नवीकरणीय कार्य में 1000 करोड रुपए से भी अधिक का निवेश करने की संभावना है यदि चरचा कालरी में सोलर एनर्जी के नाम पर जो किया जा रहा है यही ढर्रा अन्य जगहों पर भी अपनाया गया, तो सौर ऊर्जा का सपना केवल एक काल्पनिक कविता बनकर रह जाएगा। सोलर एनर्जी प्रदूषण रहित व पर्यावरण अनुकूल है इससे बिजली बिल के मद में भारी बचत होती है इसके अतिरिक्त कोयला ,डीजल, गैस या विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगा, सोलर एनर्जी से धुआं ,कार्बन या प्रदूषण नहीं फैलता है यह ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की संभावना को कम करने में मददगार होता है। कुछ दिनों पूर्व चर्चा में नए क्षेत्र प्रबंधक की पदस्थापना हुई है। अब देखना यह है कि वे इस अंधेरे में डूबे सौर प्रोजेक्ट को रोशनी देंगे या फिर यह भी फाइलों में दबकर इतिहास का हिस्सा बन जाएगा। बैकुंठपुर क्षेत्र के संवेदनशील महाप्रबंधक बी.एन. झा से अपेक्षा है कि वे तुरंत संज्ञान लेकर सोलर एनर्जी पहल आने वाली पीढिय़ों के लिए केवल भ्रष्टाचार की केस स्टडी बनकर रह जाएगी।














