
नई दिल्ली। जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर फ्लैट और घर बुक कराने के बाद घर का सपना लिए भटक रहे हजारों फ्लैट खरीदारों के दुख को सुप्रीम कोर्ट ने समझा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया है, जिससे न सिर्फ फ्लैट खरीदारों का सपना पूरा हो बल्कि रियल एस्टेट में लोगों का भरोसा भी कायम हो।
आवास का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवास का अधिकार मात्र एक अनुबंध आधारित अधिकार नहीं है, बल्कि यह संविधान के तहत मिले जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। इसलिए वह ऐसे निर्देश दे रहा है, जिससे कि भारत के नागरिकों का घर का सपना पूरा हो। उनका यह सपना जीवनभर का दु:स्वप्न न बने।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यम वर्ग के दर्द को बयां करते हुए कहा है कि घर के लिए जीवनभर की कमाई लगाने के बाद वह दोहरा बोझ ढोता है। एक तरफ घर की ईएमआइ भरता है और दूसरी ओर किराया देता है। वह सिर्फ अपने घर का सपना पूरा करना चाहता है, जो अधबनी इमारत बन कर रह जाती है।
डेवलपर घर खरीदार का शोषण करते हैं
आगे कहा कि पैसा देने के बावजूद घर नहीं मिलने की चिंता उसकी सेहत और गरिमा पर बुरा असर डालती है। यह सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह एक ऐसा सख्त तंत्र बनाए, जिसमें किसी भी डेवलपर को घर खरीदार का शोषण करने या धोखा देने की इजाजत न हो।






















