
जांजगीर। महाकाली आश्रम परिसर में सोमवार को शरद पूर्णिमा पर्व बड़े ही हर्ष, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही आश्रम के वातावरण में भक्ति और उल्लास की छटा बिखरी रही।
सुबह मां महाकाली की विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार से हवन संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने आहुति देकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। दोपहर में महाप्रसाद का वितरण किया गया। शाम के समय आयोजित भजन-संध्या और दीप प्रज्ज्वलन ने पूरे वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। भक्तों के जयकारों से पूरा आश्रम गूंज उठा।
महाकाली आश्रम प्रमुख स्वामी सुरेन्द्र नाथ जी ने बताया कि शरद पूर्णिमा वर्ष की सबसे पवित्र व ऊर्जावान रात्रि मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत तत्व की वर्षा होती है। ऐसा विश्वास है कि इस रात ध्यान, जप और हवन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं। यही कारण है कि इसे धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाना और उसे खुले आकाश में चंद्रमा की रोशनी में रखना एक प्राचीन परंपरा है। स्वामी जी ने कहा कि यह पर्व मां लक्ष्मी और मां महाकाली की आराधना का विशेष दिन है। आश्रम में हर पूर्णिमा को इसी प्रकार धार्मिक अनुष्ठान और भक्ति पूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि शांति, सद्भाव बनी रहे।



















