
कोरिया बैकुंठपुर। कांग्रेस सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना का पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और गौवंश संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपए की लागत से गोठान निर्माण कराया गया था। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देना और पशुपालन को बढ़ावा देना था। लेकिन आज यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
प्रदेश के लगभग हर ग्राम पंचायत में लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक की लागत से गोठान बनाए गए थे। निर्माण कार्य में सीमेंट, लोहे, टिन शेड, पानी की टंकी, पशु चारा भंडारण आदि की व्यवस्था की गई थी, परंतु आज इनमें से अधिकांश गोठान जर्जर और बेकार हो चुके हैं। आज स्थिति यह है कि गोठानों के सारे सामान चोरी हो गए हैं। लोहे की गेट, टिन की चादरें, पशु-पानी के टैंक, यहां तक कि शौचालय की सीटें तक चोरी हो चुकी हैं। कई जगहों पर गोठान की जमीन झाडिय़ों से भर चुकी है और भवन खंडहर बन गए हैं। जिन गोठानों को पशुपालन केंद्र के रूप में विकसित करने का सपना दिखाया गया था, वे आज असामाजिक तत्वों और चोरों के ठिकाने बन गए हैं। रात के समय इन जगहों पर शराबखोरी और अवैध गतिविधियों की शिकायतें आम हैं। सूत्रों के अनुसार, गोठान निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। निर्माण की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की रही। कई जगह तो बिना निर्माण कार्य किए ही कागजों पर भुगतान कर दिया गया। ठेकेदारों, अधिकारियों और स्थानीय स्तर के कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये हजम कर लिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गोठान निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो करोड़ों के घोटाले उजागर होंगे। कई जगह लोगों ने शासन से गोठानों की स्थिति की जांच करवाने की मांग उठाई है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो सके। करोड़ों रुपये जनता के कर से खर्च कर इन गोठानों का निर्माण किया गया था। आज इनका उपयोग न होने से शासन के धन की बर्बादी साफ झलक रही है। यह भ्रष्टाचार का ऐसा उदाहरण है जिसने जनहित योजनाओं की साख को गहरा आघात पहुंचाया है। इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि बिना उचित निगरानी और पारदर्शिता के बनाई गई योजनाएं अंतत: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं। यदि समय रहते सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो ऐसी योजनाएं जनता के विश्वास को पूरी तरह खत्म कर देंगी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार की गोठान निर्माण योजना, जो ग्रामीण विकास की मिसाल बननी थी, आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की प्रतीक बन गई है। खंडहरों में तब्दील गोठान न केवल सरकारी तंत्र की विफलता उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि योजनाओं की सफलता केवल निर्माण से नहीं, बल्कि उनके रखरखाव और ईमानदार कार्यान्वयन से होती है।




















